कुरान - 51:12 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

12
يَسۡـَٔلُونَ أَيَّانَ يَوۡمُ ٱلدِّينِ

Transliteration: (Yas'aloona ayyaana yawmud Deen)

वे पूछते हैं: "इंसाफ़ और बदले का दिन कब होगा?" [11] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 12 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 12

"वे पूछते हैं: 'इंसाफ़ और बदले का दिन कब होगा?' [11]"


[11] क़यामत के बारे में मुनकिरीन का तंज़िया सवाल

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

  • काफ़िरों का यह सवाल समझने या ईमान लाने के लिए नहीं था, बल्कि वे शक और इनकार की बिना पर तंज़न पूछते थे कि 'क़यामत कब आएगी?'
  • यह सवाल उनकी जहालत की दलील था; क़यामत का वक़्त सिर्फ़ अल्लाह तआला के इल्म में तयशुदा है और जब उसका वक़्त आएगा, तो कोई उसे टाल नहीं सकेगा।

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