कुरान - 51:14 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

14
ذُوقُواْ فِتۡنَتَكُمۡ هَٰذَا ٱلَّذِي كُنتُم بِهِۦ تَسۡتَعۡجِلُونَ

Transliteration: (Zooqoo fitnatakum haa zal lazee kuntum bihee tas ta'jiloon)

और उनसे कहा जाएगा: "चखो अपना तपाया जाना! यह वही है जिसकी तुम जल्दी मचा रहे थे [12]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 14 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 14

"और उनसे कहा जाएगा: 'चखो अपना तपाया जाना! यह वही है जिसकी तुम जल्दी मचा रहे थे [12]!'"


[12] कुफ़्र की जल्दी का दर्दनाक अंजाम

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

  • मलामत भरा ख़िताब: 'चखो अपना तपाया जाना' का हुक्म या तो अल्लाह तआला ख़ुद इरशाद फ़रमाएगा, या अज़ाब के फ़रिश्ते और दोज़ख़ के दारोग़ा उन्हें मलामत करते हुए कहेंगे।
  • हठधर्मी का नतीजा: दुनिया में वे कहते थे कि 'अगर अज़ाब सच है तो हम पर ले आओ'; अब जब अज़ाब सामने आ गया तो उन्हें याद दिलाया जा रहा है कि यह वही है जिसकी तुम जल्दी मचाया करते थे।
  • तौबा की अहमियत: यह चेतावनी इंसान को वक़्त रहते सच्ची तौबा करने और अल्लाह की रहमत की पनाह में आने की दावत देती है।

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