कुरान - 51:16 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

16
ءَاخِذِينَ مَآ ءَاتَىٰهُمۡ رَبُّهُمۡۚ إِنَّهُمۡ كَانُواْ قَبۡلَ ذَٰلِكَ مُحۡسِنِينَ

Transliteration: (Aakhizeena maaa aataahum Rabbuhum; innahum kaanoo qabla zaalika muhsineen)

लेते हुए जो कुछ उनके रब ने उन्हें दिया [14]। बेशक वे इससे पहले ही नेकोकार [15] थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 16 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 16

"लेते हुए जो कुछ उनके रब ने उन्हें दिया [14]। बेशक वे इससे पहले ही नेकोकार [15] थे।"


[14] अता-ए-इलाही और रहमत की क़ुबूलियत

जन्नत में अहले तक़वा अपने रब की अता की हुई नेअमतों को ब-ख़ुशी क़बूल करेंगे, जो उनके आमाल के बदले में अल्लाह के ख़ास फ़ज़ल व करम से अता की गई होंगी।


[15] नेकोकारों की सिफ़ात और तक़दीर

  • वे दुनिया में रहते हुए इबादत, ख़ैरात और अहकाम-ए-शरीअत की पाबंदी करने वाले 'मुहसिनीन' (नेकोकार) थे।
  • हज़रत मुफ़्ती साहब फ़रमाते हैं कि उनकी नेकी का यह आलम था कि उनकी पैदाइश से पहले ही लौहे महफ़ूज़ में उनका नाम नेक और बख़्शिश पाए हुओं में लिखा जा चुका था।

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