कुरान - 51:17 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
كَانُواْ قَلِيلٗا مِّنَ ٱلَّيۡلِ مَا يَهۡجَعُونَ

Transliteration: (kaanoo qaleelam minal laili maa yahja'oon)

वे रात में थोड़ा ही सोया करते थे [16]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 17

"वे रात में थोड़ा ही सोया करते थे [16]!"


[16] शब-बेदारी और नमाज़-ए-तहज्जुद की सुन्नत

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि अहले तक़वा की यह ख़ास सिफ़त है कि वे अपनी रातें रब की याद में गुज़ारते हैं:

  • तहज्जुद और ज़िक्र: वे रात का बड़ा हिस्सा नमाज़-ए-तहज्जुद और अल्लाह के ज़िक्र में गुज़ारते थे और सिर्फ़ थोड़ा हिस्सा सोने के लिए रखते थे।
  • सुन्नत तरीक़ा: पूरी रात सोना भी ग़फ़लत है और पूरी रात जागना भी मुनासिब नहीं। सुन्नत तरीक़ा यह है कि रात के पहले हिस्से में सोएँ, फिर पिछले हिस्से में उठकर तहज्जुद अदा करें, और फिर कुछ देर आराम करें।
  • अंसार का मामूल: सहाबा-ए-किराम (अंसार) इशा के बाद सो जाते थे, फिर तहज्जुद के लिए उठते और फ़ज्र की नमाज़ मस्जिद-ए-नबवी में हुज़ूर ﷺ के पीछे जमाअत से अदा करते थे; इस तरह उनका सोना भी इबादत में शुमार होता था।

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