कुरान - 51:15 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

15
إِنَّ ٱلۡمُتَّقِينَ فِي جَنَّـٰتٖ وَعُيُونٍ

Transliteration: (Innal muttaqeena fee jannaatinw wa 'uyoon)

बेशक परहेज़गार बाग़ों और चश्मों में [13] होंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 15

"बेशक परहेज़गार बाग़ों और चश्मों में [13] होंगे।"


[13] मुत्तक़ी बंदों के अज़ीम इनामात

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि परहेज़गारों को दुनिया और आख़िरत दोनों जगह जन्नत व चश्मों की नेअमतें अता की जाती हैं:

  • दुनिया में: परहेज़गार दुनिया में 'शरीअत के बाग़' की सैर करते हैं और 'तरीक़त के चश्मों' से सैराब होते हैं, जहाँ उन्हें इबादत और ज़िक्र में रूहानी लज़्ज़त व वज्द हासिल होता है।
  • क़ब्र में: क़ब्र में मुत्तक़ी बंदों के लिए सुकून का आलम होगा और उनकी क़ब्र जन्नत के बाग़ों में से एक बाग़िचा (रौज़ए जन्नत) बन जाएगी।
  • आख़िरत में: क़यामत के दिन वे हौज़-ए-कौसर के मुक़द्दस चश्मे से हुज़ूर अकरम ﷺ के दस्त-ए-मुबारक से सैराब होंगे। जो लोग दीन से फिर गए (मुर्तद हुए), उन्हें फ़रिश्ते धुतकार देंगे और हुज़ूर ﷺ फ़रमाएँगे: 'दूर हो जाओ, दूर हो जाओ!'

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