कुरान - 46:10 सूरह अल-अहक़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
قُلۡ أَرَءَيۡتُمۡ إِن كَانَ مِنۡ عِندِ ٱللَّهِ وَكَفَرۡتُم بِهِۦ وَشَهِدَ شَاهِدٞ مِّنۢ بَنِيٓ إِسۡرَـٰٓءِيلَ عَلَىٰ مِثۡلِهِۦ فَـَٔامَنَ وَٱسۡتَكۡبَرۡتُمۡۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَهۡدِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلظَّـٰلِمِينَ

Transliteration: (Qul ara'aytum in kaana min 'indil laahi wa kafartum bihee wa shahida shaahidum mim Banee Israaa'eela 'alaa mislihee fa aamana wastak bartum innal laaha laa yahdil qawmaz zaalimeen (section 1))

आप फ़रमाइए: "भला देखो तो, अगर यह (क़ुरआन) अल्लाह की तरफ़ से हो [27] और तुमने इसका इनकार किया, हालाँकि बनी इसराईल में से एक गवाह ने इसकी जैसी किताब पर गवाही दी [28] और वह ईमान ले आया और तुमने तकब्बुर किया? बेशक अल्लाह ज़ालिम क़ौम को हिदायत नहीं देता [29]"। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहक़ाफ़ आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहक़ाफ़ तफ़सीर - आयत 10

"आप फ़रमाइए: 'भला देखो तो, अगर यह (क़ुरआन) अल्लाह की तरफ़ से हो [27] और तुमने इसका इनकार किया, हालाँकि बनी इसराईल में से एक गवाह ने इसकी जैसी किताब पर गवाही दी [28] और वह ईमान ले आया और तुमने तकब्बुर किया? बेशक अल्लाह ज़ालिम क़ौम को हिदायत नहीं देता [29]'।"

[27] दलील-ए-क़ातिया से समझाना

यह अंदाज़-ए-बयान काफ़िरों को समझाने के लिए है कि अगर यह क़ुरआन सचमुच अल्लाह का कलाम है (जैसा कि यक़ीनन है), तो सोचो तुम्हारा इनकार तुम्हें किस क़दर भयानक अज़ाब में डाल देगा!

[28] हज़रत अब्दुल्लाह बिन सलाम रज़ियल्लाहु अन्हु की अज़ीम गवाही

बनी इसराईल के गवाह से मुराद हज़रत अब्दुल्लाह बिन सलाम रज़ियल्लाहु अन्हु हैं, जो यहूदियों के बहुत बड़े आलिम और हज़रत हारून अलैहिस्सलाम की औलाद में से थे।

जब हुज़ूर ﷺ मदीना मुनव्वरा तशरीफ़ लाए, तो हज़रत अब्दुल्लाह बिन सलाम ने आपका चेहरा-ए-अनवर देखकर फ़रमाया: “यह चेहरा किसी झूठे का चेहरा नहीं हो सकता”, और फ़ौरन कलमा पढ़कर मुसलमान हो गए। उन्होंने तौरात के हवाले से गवाही दी कि क़ुरआन और हुज़ूर ﷺ बिल्कुल बरहक़ हैं।

[29] तकब्बुर और ज़ुल्म हिदायत से महरूम कर देते हैं

जो लोग हक़ को जानने के बावजूद तकब्बुर, हसद और ज़ुल्म पर अड़े रहते हैं, अल्लाह उन्हें हिदायत की तौफ़ीक़ से महरूम फ़रमा देता है।

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