कुरान - 46:8 सूरह अल-अहक़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
أَمۡ يَقُولُونَ ٱفۡتَرَىٰهُۖ قُلۡ إِنِ ٱفۡتَرَيۡتُهُۥ فَلَا تَمۡلِكُونَ لِي مِنَ ٱللَّهِ شَيۡـًٔاۖ هُوَ أَعۡلَمُ بِمَا تُفِيضُونَ فِيهِۚ كَفَىٰ بِهِۦ شَهِيدَۢا بَيۡنِي وَبَيۡنَكُمۡۖ وَهُوَ ٱلۡغَفُورُ ٱلرَّحِيمُ

Transliteration: (Am yaqooloonaf taraahu qul inif taraituhoo falaa tamlikoona lee minal laahi shai'an Huwa a'lamu bimaa tufeedoona feehi kafaa bihee shaheedam bainee wa bainakum wa Huwal Ghafoorur Raheem)

क्या वे कहते हैं: "इन्होंने इसे ख़ुद घड़ लिया [18] है?" आप फ़रमाइए: "अगर मैंने इसे घड़ा होता, तो तुम अल्लाह के मुक़ाबले में मेरे किसी काम न आ सकते [19]। वह ख़ूब जानता है जिन बातों में तुम मशग़ूल हो [20]; मेरे और तुम्हारे दरमियान वही गवाह काफ़ी [21] है; और वही बख़्शने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला [22] है"। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहक़ाफ़ आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहक़ाफ़ तफ़सीर - आयत 8

"क्या वे कहते हैं: 'इन्होंने इसे ख़ुद घड़ लिया [18] है?' आप फ़रमाइए: 'अगर मैंने इसे घड़ा होता, तो तुम अल्लाह के मुक़ाबले में मेरे किसी काम न आ सकते [19]। वह ख़ूब जानता है जिन बातों में तुम मशग़ूल हो [20]; मेरे और तुम्हारे दरमियान वही गवाह काफ़ी [21] है; और वही बख़्शने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला [22] है'।"

[18] बोहतान का दो-टूक जवाब

काफ़िरों ने तोहमत लगाई कि हुज़ूर ﷺ ने यह क़ुरआन ख़ुद घड़ लिया है। अल्लाह ने हुज़ूर ﷺ को हुक्म दिया कि उन्हें ऐसा जवाब दीजिए जो उनकी अक़्लों को दंग कर दे।

[19] अज़ाब-ए-इलाही की हैबत

आप फ़रमा दीजिए कि अगर मैं अल्लाह पर झूठ बाँधता तो क्या अल्लाह की पकड़ से मुझे कोई बचा सकता था? जो शख़्स अल्लाह की अजमत और पकड़ से वाक़िफ़ हो, वह कभी ऐसी जुर्रत नहीं कर सकता।

[20] अल्लाह तुम्हारे इफ़्तिरा (बोहतान) को जानता है

तुम जो बदगुमानियाँ और झूठे इल्ज़ामात लगा रहे हो, अल्लाह तुम्हारे हर लफ़्ज़ और साज़िश से पूरी तरह बा-ख़बर है और वह तुम्हें इसका बदला देगा।

[21] अल्लाह की गवाही और मोजिज़ात

अल्लाह तआला ने हुज़ूर अकरम ﷺ की नुबूवत पर अनगिनत मोजिज़ात अता फ़रमा कर आपकी सच्चाई पर अपनी गवाही क़ायम फ़रमा दी है।

[22] रहमत और तौबा की दावत

इतने जुर्मों और कुफ़्र के बावजूद अल्लाह तआला काफ़िरों को तौबा की दावत देता है कि अगर वे अब भी ईमान ले आएं, तो अल्लाह उनके पिछले तमाम गुनाहों को माफ़ फ़रमा देगा, क्योंकि वह ग़फ़ूर-उर-रहीम है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now