Transliteration: (Am yaqooloonaf taraahu qul inif taraituhoo falaa tamlikoona lee minal laahi shai'an Huwa a'lamu bimaa tufeedoona feehi kafaa bihee shaheedam bainee wa bainakum wa Huwal Ghafoorur Raheem)
"क्या वे कहते हैं: 'इन्होंने इसे ख़ुद घड़ लिया [18] है?' आप फ़रमाइए: 'अगर मैंने इसे घड़ा होता, तो तुम अल्लाह के मुक़ाबले में मेरे किसी काम न आ सकते [19]। वह ख़ूब जानता है जिन बातों में तुम मशग़ूल हो [20]; मेरे और तुम्हारे दरमियान वही गवाह काफ़ी [21] है; और वही बख़्शने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला [22] है'।"
काफ़िरों ने तोहमत लगाई कि हुज़ूर ﷺ ने यह क़ुरआन ख़ुद घड़ लिया है। अल्लाह ने हुज़ूर ﷺ को हुक्म दिया कि उन्हें ऐसा जवाब दीजिए जो उनकी अक़्लों को दंग कर दे।
आप फ़रमा दीजिए कि अगर मैं अल्लाह पर झूठ बाँधता तो क्या अल्लाह की पकड़ से मुझे कोई बचा सकता था? जो शख़्स अल्लाह की अजमत और पकड़ से वाक़िफ़ हो, वह कभी ऐसी जुर्रत नहीं कर सकता।
तुम जो बदगुमानियाँ और झूठे इल्ज़ामात लगा रहे हो, अल्लाह तुम्हारे हर लफ़्ज़ और साज़िश से पूरी तरह बा-ख़बर है और वह तुम्हें इसका बदला देगा।
अल्लाह तआला ने हुज़ूर अकरम ﷺ की नुबूवत पर अनगिनत मोजिज़ात अता फ़रमा कर आपकी सच्चाई पर अपनी गवाही क़ायम फ़रमा दी है।
इतने जुर्मों और कुफ़्र के बावजूद अल्लाह तआला काफ़िरों को तौबा की दावत देता है कि अगर वे अब भी ईमान ले आएं, तो अल्लाह उनके पिछले तमाम गुनाहों को माफ़ फ़रमा देगा, क्योंकि वह ग़फ़ूर-उर-रहीम है।
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