कुरान - 46:7 सूरह अल-अहक़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
وَإِذَا تُتۡلَىٰ عَلَيۡهِمۡ ءَايَٰتُنَا بَيِّنَٰتٖ قَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لِلۡحَقِّ لَمَّا جَآءَهُمۡ هَٰذَا سِحۡرٞ مُّبِينٌ

Transliteration: (Wa izaa tutlaa 'alaihim Aayaatunaa baiyinaatin qaalal lazeena kafaroo lilhaqqi lammaa jaaa'ahum haazaa sihrum mubeen)

और जब उनके सामने हमारी रौशन आयतें [16] पढ़ी जाती हैं, तो काफ़िर लोग हक़ के बारे में, जब वह उनके पास आ चुका, कहते हैं: "यह तो खुला जादू [17] है"। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहक़ाफ़ आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहक़ाफ़ तफ़सीर - आयत 7

"और जब उनके सामने हमारी रौशन आयतें [16] पढ़ी जाती हैं, तो काफ़िर लोग हक़ के बारे में, जब वह उनके पास आ चुका, कहते हैं: 'यह तो खुला जादू [17] है'।"

[16] क़ुरआन की मुअज्ज़िज़ आयतें

क़ुरआन-ए-पाक की आयतें ऐसी रौशन, मुअस्सिर और दिलों को छू लेने वाली हैं कि कोई दिल उनकी तासीर से बच नहीं सकता।

[17] हक़ को जादू क़रार देना मुनकिरीन की बेबसी

जब वे क़ुरआन की बेमिसाल फ़साहत, बलाग़त और रूहानी तासीर का कोई मुक़ाबला न कर सके, तो अपनी आजिज़ी को छुपाने के लिए उसे ‘खुला जादू’ कहने लगे। यह उनकी हठधर्मी और जिहालत का खुला सुबूत था।

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