कुरान - 46:6 सूरह अल-अहक़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

6
وَإِذَا حُشِرَ ٱلنَّاسُ كَانُواْ لَهُمۡ أَعۡدَآءٗ وَكَانُواْ بِعِبَادَتِهِمۡ كَٰفِرِينَ

Transliteration: (Wa izaa hushiran naasu kaanoo lahum a'daaa'anw wa kaanoo bi'ibaadatihim kaafireen)

और जब लोग जमा किए जाएंगे, तो वे उनके दुश्मन बन जाएंगे [14] और उनकी पूजा से मुनकिर [15] हो जाएंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहक़ाफ़ आयत 6 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहक़ाफ़ तफ़सीर - आयत 6

"और जब लोग जमा किए जाएंगे, तो वे उनके दुश्मन बन जाएंगे [14] और उनकी पूजा से मुनकिर [15] हो जाएंगे।"

[14] क़ियामत के दिन माबूदों की दुश्मनी

क़ियामत के दिन अल्लाह तआला इन बुतों को गोयाई (बोलने की ताक़त) अता फ़रमाएगा, और वे अपने ही पूजने वालों पर लानत भेजेंगे और उनके दुश्मन बन जाएंगे।

[15] पूजा का साफ़ इनकार

वे साफ़ कह देंगे कि ऐ अल्लाह! हमने इन्हें अपनी पूजा का हुक्म नहीं दिया था, ये तो अपने नफ़्स और शैतान की पूजा करते थे। इस तरह मुशरिकीन के माबूद ही उनके ख़िलाफ़ गवाही देंगे।

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