Transliteration: (Qul ara'aytum maa tad'oona min doonil laahi aroonee maazaa khalaqoo minal ardi am lahum shirkun fis samaawaati eetoonee bi kitaabim min qabli haazaaa aw asaaratim min 'ilmin in kuntum saadiqeen)
"आप फ़रमाइए: 'भला देखो तो सही जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पूजते हो? मुझे दिखाओ उन्होंने ज़मीन का कौन सा हिस्सा बनाया [7] है, या आसमानों में उनकी कोई शिरकत [8] है? मेरे पास इससे पहले की कोई किताब या इल्म का कोई बचा-खुचा हिस्सा लाओ [9], अगर तुम सच्चे हो'।"
मुशरिकीन जिन बुतों, पत्थरों या मख़लूक़ात की इबादत करते थे, उन्हें खुला चैलेंज दिया गया कि दिखाओ ज़मीन का एक ज़र्रा भी तुम्हारे इन माबूदों ने पैदा किया है? जब वे एक तिनका भी नहीं बना सकते तो वे माबूद कैसे हो सकते हैं?
न ज़मीन में उनका कोई अमल-दख़ल है और न ही आसमानों की तख़लीक़ में उनकी कोई शिरकत है। तख़लीक़ जब सिर्फ़ अल्लाह ही की है, तो इबादत भी सिर्फ़ उसी वाहिद की होनी चाहिए।
फ़रमाया कि अपने शिर्क के हक़ में कोई आसमानी सनद या अंबिया के इल्म का कोई बचा हुआ हिस्सा पेश करो। चूँकि किसी नबी या आसमानी किताब ने शिर्क की इजाज़त नहीं दी, इसलिए मुशरिकीन के पास कोई दलील नहीं है।
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