Transliteration: (Maa khalaqnas samaawaati wal arda wa maa bainahumaaa illaa bilhaqqi wa ajalim musammaa; wallazeena kafaroo 'ammaaa unziroo mu'ridoon)
"हमने आसमानों और ज़मीन को और जो कुछ उनके दरमियान है, सिर्फ़ हक़ [4] के साथ और एक मुक़र्ररा मुद्दत [5] के लिए पैदा फ़रमाया है; और काफ़िर लोग उस चीज़ से मुंह फेरते हैं जिससे उन्हें डराया गया [6] है।"
कायनात की तख़लीक़ कोई बे-मक़सद खेल नहीं, बल्कि इसे हक़ और अज़ीम हिकमत के तहत बनाया गया है—ताकि इंसान अपने रब को पहचाने और उसकी इबादत करे।
इस दुनिया और आसमान व ज़मीन की ज़िंदगी हमेशा रहने वाली नहीं, बल्कि इसका एक मुक़र्ररा वक़्त और मुद्दत तय है। जब वह वक़्त पूरा होगा, तो क़ियामत बरपा होगी और हर जान को अपने आमाल का हिसाब देना होगा।
काफ़िरों का हाल यह है कि जब उन्हें क़ियामत और अज़ाब से डराया जाता है, तो वे तौबा करने के बजाय हक़ से मुंह फेर लेते हैं और अपनी सरकशी पर अड़े रहते हैं।
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