Transliteration: (Wa man adallu mimmany yad'oo min doonil laahi mallaa yastajeebu lahooo ilaa Yawmil Qiyaamati wa hum'an du'aaa'ihim ghaafiloon)
"और उससे बढ़कर कौन गुमराह [10] है जो अल्लाह के सिवा ऐसे को पूजे जो क़ियामत के दिन तक उसकी बात न सुन सके [11], बल्कि वे उनकी पूजा से बिल्कुल बे-ख़बर [12] हैं।"
उस शख़्स से ज़्यादा भटका हुआ कौन हो सकता है जो अपने ख़ालिक़ को छोड़कर बे-जान पत्थरों और बुतों के आगे माथा टेकता है।
वे बुत क़ियामत तक भी किसी की फ़रियाद नहीं सुन सकते और न किसी दुआ का जवाब दे सकते हैं।
यहाँ लफ़्ज़ ‘बे-ख़बर’ पत्थरों और बुतों के लिए आया है जो पूरी तरह बे-जान और जमादात हैं। यह आयत बुतों के बारे में है। अंबिया-ए-किराम और औलिया-ए-इज़ाम अल्लाह के इज़्न से सुनते भी हैं और मदद भी फ़रमाते हैं, जैसा कि हदीस-ए-पाक और अहादीस-ए-सहाबा से साबित है। लिहाज़ा बुतों की आयतों को अल्लाह के मक़बूल बंदों पर फ़िट करना सख़्त गुमराही और ख़ारिजियत है।
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