कुरान - 46:2 सूरह अल-अहक़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

2
تَنزِيلُ ٱلۡكِتَٰبِ مِنَ ٱللَّهِ ٱلۡعَزِيزِ ٱلۡحَكِيمِ

Transliteration: (Tanzeelul Kitaabi minal laahil-'Azeezil Hakeem)

इस किताब का उतारा जाना [2] अल्लाह की तरफ़ से है, जो इज़्ज़त वाला, हिकमत वाला [3] है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहक़ाफ़ आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहक़ाफ़ तफ़सीर - आयत 2

"इस किताब का उतारा जाना [2] अल्लाह की तरफ़ से है, जो इज़्ज़त वाला, हिकमत वाला [3] है।"

[2] क़ुरआन-ए-पाक का नुज़ूल

यह मुक़द्दस कलाम किसी इंसान की तसनीफ़ या शायराना ख़याल नहीं, बल्कि रब्बुल आलमीन की तरफ़ से नाज़िल हुआ है।

[3] इज़्ज़त और हिकमत का मज़हर

अल्लाह तआला का ‘इज़्ज़त वाला’ (अज़ीज़) होना यह ज़ाहिर करता है कि वह तमाम कायनात पर ग़ालिब है, और उसका ‘हिकमत वाला’ (हकीम) होना यह बताता है कि इस किताब का हर हुक्म, आयत और क़ानून हिकमत से भरपूर है।

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