कुरान - 46:12 सूरह अल-अहक़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

12
وَمِن قَبۡلِهِۦ كِتَٰبُ مُوسَىٰٓ إِمَامٗا وَرَحۡمَةٗۚ وَهَٰذَا كِتَٰبٞ مُّصَدِّقٞ لِّسَانًا عَرَبِيّٗا لِّيُنذِرَ ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ وَبُشۡرَىٰ لِلۡمُحۡسِنِينَ

Transliteration: (Wa min qablihee kitaabu Moosaaa imaamanw-wa rahmah; wa haazaa Kitaabum musad diqul lisaanan 'Arabiyyal liyunziral lazeena zalamoo wa bushraa lilmuhsineen)

और इससे पहले मूसा की किताब रहनुमा और रहमत थी [32], और यह ऐसी किताब है जो अरबी ज़बान में तस्दीक़ फ़रमाने वाली [33] है, ताकि ज़ालिमों को डराए और नेकोकारों को खुशखबरी दे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहक़ाफ़ आयत 12 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहक़ाफ़ तफ़सीर - आयत 12

"और इससे पहले मूसा की किताब रहनुमा और रहमत थी [32], और यह ऐसी किताब है जो अरबी ज़बान में तस्दीक़ फ़रमाने वाली [33] है, ताकि ज़ालिमों को डराए और नेकोकारों को खुशखबरी दे।"

[32] हज़रत मूसा की किताब (तौरात)

क़ुरआन से पहले हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम पर तौरात नाज़िल हुई जो अपने दौर में बनी इसराईल के लिए हिदायत और रहमत थी।

[33] क़ुरआन-ए-पाक पिछली किताबों की तस्दीक़ करता है

क़ुरआन-ए-मजीद साफ़ और फ़सीह अरबी ज़बान में नाज़िल हुआ जो पिछली तमाम आसमानी किताबों की असल तालीमात की तस्दीक़ करता है। यह ज़ालिमों के लिए अज़ाब की चेतावनी और नेकोकारों के लिए जन्नत की अज़ीम बशारत है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now