कुरान - 46:11 सूरह अल-अहक़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لِلَّذِينَ ءَامَنُواْ لَوۡ كَانَ خَيۡرٗا مَّا سَبَقُونَآ إِلَيۡهِۚ وَإِذۡ لَمۡ يَهۡتَدُواْ بِهِۦ فَسَيَقُولُونَ هَٰذَآ إِفۡكٞ قَدِيمٞ

Transliteration: (Wa qaalal lazeena kafaroo lillazeena aamanoo law kaana khairam maa sabaqoonaaa ilyh; wa iz lam yahtadoo bihee fasa yaqooloona haazaaa ifkun qadeem)

और काफ़िरों ने ईमान वालों के बारे में कहा: "अगर इसमें कुछ भलाई होती तो वे इसकी तरफ़ हमसे पहले न बढ़ पाते [30]"; और जब उन्होंने इससे हिदायत न पाई, तो अब ज़रूर कहेंगे: "यह तो पुराना झूठ [31] है"। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहक़ाफ़ आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहक़ाफ़ तफ़सीर - आयत 11

"और काफ़िरों ने ईमान वालों के बारे में कहा: 'अगर इसमें कुछ भलाई होती तो वे इसकी तरफ़ हमसे पहले न बढ़ पाते [30]'; और जब उन्होंने इससे हिदायत न पाई, तो अब ज़रूर कहेंगे: 'यह तो पुराना झूठ [31] है'।"

[30] मुतक़ब्बिरीन का फ़ासिला और तकब्बुर

मक्के के बड़े-बड़े सरदार (जैसे अबू जहल वग़ैरा) ग़रीब और कमज़ोर सहाबा (जैसे हज़रत बिलाल, हज़रत अम्मार, हज़रत सुहैब रज़ियल्लाहु अन्हुम) को देखकर तकब्बुर से कहते थे कि अगर यह नया दीन कोई अच्छी चीज़ होता, तो ये ग़रीब लोग हमसे पहले इसे क़बूल न करते; हम बड़े लोग हैं, हमें पहले मिलना चाहिए था।

[31] महरूम होकर हक़ को झुटलाना

जब अपनी बदबख़्ती की वजह से वे हिदायत से महरूम रह गए, तो अपनी नाकामी छुपाने के लिए कहने लगे कि यह क़ुरआन तो अगलों का पुराना अफ़साना और झूठ है।

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