Transliteration: (Innal lazeena qaaloo Rabbunal laahu summas taqaamoo falaa khawfun 'alaihim wa laahum yahzanoon)
"बेशक जिन्होंने कहा: 'हमारा रब अल्लाह है [34]', फिर उस पर साबित-क़दम रहे [35], तो उन पर न कोई ख़ौफ़ [36] होगा और न वे ग़मगीन होंगे [37]।"
यानी जिन्होंने ज़बान और दिल से इक़रार किया कि हमारा माबूद, ख़ालिक़ और परवरदिगार सिर्फ़ अल्लाह तआला है।
ईमान लाने के बाद अपनी आख़िरी साँस तक उसी अक़ीदे पर जमे रहे, दुनिया की कोई लालच, ज़ुल्म या आज़माइश उनके क़दमों को डगमगा न सकी। ‘इस्तिक़ामत’ तमाम करामातों से बढ़कर करामत है। हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु अन्हु ने फ़रमाया: “इस्तिक़ामत यह है कि इंसान कभी शिर्क और कुफ़्र की तरफ़ आँख उठाकर भी न देखे”।
मौत के वक़्त, क़ब्र में और क़ियामत के दिन उन्हें न आइंदा का कोई ख़ौफ़ होगा और न पीछे छूटने वाली दुनिया का कोई मलाल। फ़रिश्ते उन्हें जन्नत की खुशख़बरी देंगे।
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