कुरान - 46:17 सूरह अल-अहक़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
وَٱلَّذِي قَالَ لِوَٰلِدَيۡهِ أُفّٖ لَّكُمَآ أَتَعِدَانِنِيٓ أَنۡ أُخۡرَجَ وَقَدۡ خَلَتِ ٱلۡقُرُونُ مِن قَبۡلِي وَهُمَا يَسۡتَغِيثَانِ ٱللَّهَ وَيۡلَكَ ءَامِنۡ إِنَّ وَعۡدَ ٱللَّهِ حَقّٞ فَيَقُولُ مَا هَٰذَآ إِلَّآ أَسَٰطِيرُ ٱلۡأَوَّلِينَ

Transliteration: (Wallazee qaala liwaali daihi uffil lakumaaa ata'idanineee an ukhraja wa qad khalatil quroonu min qablee wa humaa yastagheesaanil laaha wailaka aamin inna wa'dal laahi haqq, fa yaqoolu maa haazaaa illaaa asaateerul awwaleen)

और वह शख़्स जिसने अपने माँ-बाप से कहा: "उफ़, मैं तुमसे तंग आ गया [49]! क्या तुम मुझे यह डरावा देते हो कि मैं दोबारा निकाला जाऊंगा, हालाँकि मुझसे पहले कितनी ही नस्लें [50] गुज़र चुकी हैं?" और वे दोनों अल्लाह से फ़रियाद करते हैं: "तेरा बुरा हो, ईमान ले आ! बेशक अल्लाह का वादा [51] सच्चा है"; तो वह कहता है: "यह तो महज़ अगलों के अफ़साने [52] हैं"। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहक़ाफ़ आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहक़ाफ़ तफ़सीर - आयत 17

"और वह शख़्स जिसने अपने माँ-बाप से कहा: 'उफ़, मैं तुमसे तंग आ गया [49]! क्या तुम मुझे यह डरावा देते हो कि मैं दोबारा निकाला जाऊंगा, हालाँकि मुझसे पहले कितनी ही नस्लें [50] गुज़र चुकी हैं?' और वे दोनों अल्लाह से फ़रियाद करते हैं: 'तेरा बुरा हो, ईमान ले आ! बेशक अल्लाह का वादा [51] सच्चा है'; तो वह कहता है: 'यह तो महज़ अगलों के अफ़साने [52] हैं'।"

[49] माँ-बाप की नाफ़रमानी और गुस्ताख़ी

हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ जैसी नेक औलाद के बरअक्स यहाँ एक बदबख़्त और नाफ़रमान बेटे का ज़िक्र है जो अपने नेक माँ-बाप की नसीहत पर झुंझलाता है और उन्हें ‘उफ़’ कहकर झिड़कता है।

[50] तारीख़ का हवाला देकर क़ियामत का इनकार

वह कहता है कि मुझसे पहले हज़ारों नस्लें मरकर मिट्टी हो चुकी हैं, उनमें से तो कोई दोबारा ज़िंदा होकर नहीं आया। यह उसकी माद्दापरस्ती और अक़्ल का अंधापन था।

[51] माँ-बाप की दर्दभरी फ़रियाद

नेक माँ-बाप अपने बेटे की आख़िरत की तबाही देखकर तड़प उठते हैं और अल्लाह की बारगाह में दुआ करते हुए बेटे को समझाते हैं कि ख़ुदा के लिए ईमान ले आ, अल्लाह का वादा सच्चा है।

[52] हक़ को अफ़साना क़रार देना

मगर वह ढीठ बेटा क़ियामत और वह्य को पुराने लोगों की मनघड़ंत कहानियाँ क़रार देकर ठुकरा देता है।

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