कुरान - 46:19 सूरह अल-अहक़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
وَلِكُلّٖ دَرَجَٰتٞ مِّمَّا عَمِلُواْۖ وَلِيُوَفِّيَهُمۡ أَعۡمَٰلَهُمۡ وَهُمۡ لَا يُظۡلَمُونَ

Transliteration: (Wa likullin darajaatum mimmaa 'amiloo wa liyuwaf fiyahum a'maalahum wa hum laa yuzlamoon)

और हर एक के लिए उनके आमाल के मुताबिक़ दरजात [55] हैं, और ताकि वह उन्हें उनके आमाल का पूरा बदला दे और उन पर कोई ज़ुल्म न हो। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहक़ाफ़ आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहक़ाफ़ तफ़सीर - आयत 19

"और हर एक के लिए उनके आमाल के मुताबिक़ दरजात [55] हैं, और ताकि वह उन्हें उनके आमाल का पूरा बदला दे और उन पर कोई ज़ुल्म न हो।"

[55] जन्नत और जहन्नम के दरजात व तबक़ात

अल्लाह तआला ने हर इंसान के लिए उसके आमाल के एतबार से मर्तबे मुक़र्रर फ़रमाए हैं:

  • नेकोकारों के लिए जन्नत के ऊँचे दरजात हैं जहाँ हर मोमिन को उसके ईमान, इख़्लास और नेक आमाल के मुताबिक़ बुलंदी अता होगी।

  • जबकि काफ़िरों और मुजरिमों के लिए जहन्नम के निचले गढ़े (दरकात) हैं जहाँ उनके कुफ़्र और ज़ुल्म की शिद्दत के मुताबिक़ अज़ाब के अलग-अलग तबक़ात होंगे।

किसी के साथ कोई बे-इंसाफ़ी नहीं होगी; हर एक को उसके आमाल का पूरा-पूरा बदला मिलेगा।

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