Transliteration: (Wa likullin darajaatum mimmaa 'amiloo wa liyuwaf fiyahum a'maalahum wa hum laa yuzlamoon)
"और हर एक के लिए उनके आमाल के मुताबिक़ दरजात [55] हैं, और ताकि वह उन्हें उनके आमाल का पूरा बदला दे और उन पर कोई ज़ुल्म न हो।"
अल्लाह तआला ने हर इंसान के लिए उसके आमाल के एतबार से मर्तबे मुक़र्रर फ़रमाए हैं:
नेकोकारों के लिए जन्नत के ऊँचे दरजात हैं जहाँ हर मोमिन को उसके ईमान, इख़्लास और नेक आमाल के मुताबिक़ बुलंदी अता होगी।
जबकि काफ़िरों और मुजरिमों के लिए जहन्नम के निचले गढ़े (दरकात) हैं जहाँ उनके कुफ़्र और ज़ुल्म की शिद्दत के मुताबिक़ अज़ाब के अलग-अलग तबक़ात होंगे।
किसी के साथ कोई बे-इंसाफ़ी नहीं होगी; हर एक को उसके आमाल का पूरा-पूरा बदला मिलेगा।
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