Transliteration: (Wazkur akhaa 'Aad, iz anzara qawmahoo bil Ahqaafi wa qad khalatin nuzuru mim baini yadaihi wa min khalfiheee allaa ta'budooo illal laaha inneee akhaafu 'alaikum 'azaaba Yawmin 'azeem)
"और आद के भाई (हज़रत हूद अलैहिस्सलाम) [61] को याद कीजिए, जब उन्होंने अहक़ाफ़ [62] (रेत के टीलों) में अपनी क़ौम को डराया—हालाँकि उनसे पहले और उनके बाद भी बहुत से डराने वाले (पैग़म्बर) [63] आ चुके थे—कि: 'अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करो [64]; बेशक मुझे तुम पर एक बड़े दिन के अज़ाब [65] का ख़ौफ़ है'।"
हज़रत हूद अलैहिस्सलाम क़ौम-ए-आद ही के एक मुअज़्ज़म ख़ानदान से तअल्लुक़ रखते थे, इसलिए नसब के एतबार से उन्हें उनका ‘भाई’ फ़रमाया गया ताकि वे उनकी बात को हमदर्दी और नर्मी से समझें।
‘अहक़ाफ़’ जमा है ‘हिक़फ़’ की, जिसका मतलब रेत के लंबे और ऊँचे टीले है। यह इलाक़ा यमन और ओमान के दरमियान सहरा-ए-हज़रमौत में वाक़ेअ था जहाँ क़ौम-ए-आद आबाद थी। इसी मक़ाम के नाम पर इस सूरह का नाम सूरह अल-अहक़ाफ़ रखा गया है।
हज़रत हूद पहले रसूल नहीं थे, बल्कि उनसे पहले और उनके बाद भी अल्लाह के नबी इंसानियत की रहनुमाई के लिए मुसलसल आते रहे।
आपने अपनी क़ौम को ख़ालिस तौहीद की दावत दी और शिर्क के भयानक अंजाम व क़ियामत के अज़ाब से आगाह फ़रमाया।
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