कुरान - 46:23 सूरह अल-अहक़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

23
قَالَ إِنَّمَا ٱلۡعِلۡمُ عِندَ ٱللَّهِ وَأُبَلِّغُكُم مَّآ أُرۡسِلۡتُ بِهِۦ وَلَٰكِنِّيٓ أَرَىٰكُمۡ قَوۡمٗا تَجۡهَلُونَ

Transliteration: (Qaala innamal 'ilmu indal laahi wa uballighukum maaa ursiltu bihee wa laakinneee araakum qawman tajhaloon)

उन्होंने फ़रमाया: "उसका इल्म तो सिर्फ़ अल्लाह ही के पास है [66], और मैं तुम्हें वह पैग़ाम पहुँचा रहा हूँ जिसके साथ मुझे भेजा गया है [67]; लेकिन मैं देख रहा हूँ कि तुम एक जाहिल क़ौम [68] हो"। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहक़ाफ़ आयत 23 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहक़ाफ़ तफ़सीर - आयत 23

"उन्होंने फ़रमाया: 'उसका इल्म तो सिर्फ़ अल्लाह ही के पास है [66], और मैं तुम्हें वह पैग़ाम पहुँचा रहा हूँ जिसके साथ मुझे भेजा गया है [67]; लेकिन मैं देख रहा हूँ कि तुम एक जाहिल क़ौम [68] हो'।"

[66] अज़ाब के मुक़र्ररा वक़्त का इल्म

अज़ाब कब और किस घड़ी नाज़िल होगा, इसका मुतलक़ फ़ैसला और वक़्त अल्लाह तआला ही के इख़्तियार में है।

[67] तबलीग़-ए-रिसालत की ज़िम्मेदारी

नबी का काम अल्लाह का पैग़ाम पूरी अमानतदारी और वज़ाहत के साथ बंदों तक पहुँचा देना है, किसी पर जबरन अज़ाब लाना नबी की ज़िम्मेदारी नहीं।

[68] जिहालत और नादानी की इंतिहा

हज़रत हूद ने फ़रमाया कि तुम निहायत नादान और जाहिल हो जो रहमत मांगने के बजाय अपने ऊपर अज़ाब को दावत दे रहे हो।

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