कुरान - 46:24 सूरह अल-अहक़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

24
فَلَمَّا رَأَوۡهُ عَارِضٗا مُّسۡتَقۡبِلَ أَوۡدِيَتِهِمۡ قَالُواْ هَٰذَا عَارِضٞ مُّمۡطِرُنَاۚ بَلۡ هُوَ مَا ٱسۡتَعۡجَلۡتُم بِهِۦۖ رِيحٞ فِيهَا عَذَابٌ أَلِيمٞ

Transliteration: (Falammaa ra awhu 'aaridam mustaqbila awdiyatihim qaaloo haazaa 'aaridum mumtirunaa; bal huwa masta'jaltum bihee reehun feehaa 'azaabun aleem)

फिर जब उन्होंने उस (अज़ाब) को बादल की सूरत में अपनी वादियों की तरफ़ आते देखा, तो कहने लगे: "यह तो बादल है जो हम पर बारिश बरसाएगा [69]"। (हूद ने फ़रमाया): "नहीं! बल्कि यह वही चीज़ है जिसकी तुमने जल्दी मचा रखी थी—एक ऐसी आँधी [70] जिसमें दर्दनाक अज़ाब है"। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहक़ाफ़ आयत 24 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहक़ाफ़ तफ़सीर - आयत 24

"फिर जब उन्होंने उस (अज़ाब) को बादल की सूरत में अपनी वादियों की तरफ़ आते देखा, तो कहने लगे: 'यह तो बादल है जो हम पर बारिश बरसाएगा [69]'। (हूद ने फ़रमाया): 'नहीं! बल्कि यह वही चीज़ है जिसकी तुमने जल्दी मचा रखी थी—एक ऐसी आँधी [70] जिसमें दर्दनाक अज़ाब है'।"

[69] अज़ाब को बारिश समझकर ख़ुश होना

अहक़ाफ़ के लोग लंबे अर्से से क़हत और सूखे में मुब्तला थे। जब उन्होंने काले बादलों को अपनी वादियों की तरफ़ बढ़ते देखा तो ख़ुशी से झूम उठे कि अब बारिश होगी। मगर वह रहमत का बादल नहीं बल्कि इलाही अज़ाब की काली घटा थी।

[70] नबी की बसीरत और ख़ौफ़नाक आँधी की हक़ीक़त

हज़रत हूद अलैहिस्सलाम ने हक़ीक़त खोल दी कि यह बारिश नहीं बल्कि वही आँधी है जिसे तुम मज़ाक़ में जल्दी बुला रहे थे। नबियों को अल्लाह तआला ऐसी बसीरत और इल्म अता फ़रमाता है कि वे ज़ाहिरी पर्दों के पीछे छुपी हुई हक़ीक़तों को बख़ूबी देख लेते हैं।

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