Transliteration: (Tudammiru kulla shai'im bi-amri Rabbihaa fa asbahoo laa yuraaa illaa masaakinuhum; kazaalika najzil qawmal mujrimeen)
"जो अपने रब के हुक्म से हर चीज़ को तबाह कर देगी [71]; तो सुबह के वक़्त ऐसा आलम हुआ कि उनके वीरान मकानात के सिवा कुछ नज़र न आता था। हम मुजरिम क़ौम को यूँ ही बदला देते हैं [72]।"
उस शदीद और चीख़ती हुई आँधी ने इंसानों, जानवरों और दरख़्तों को उखाड़ फेंका और उन्हें सूखी घास की तरह उड़ा दिया। सात रातें और आठ दिन मुसलसल यह तूफ़ान चलता रहा यहाँ तक कि पूरी क़ौम हलाक हो गई।
हज़रत हूद अलैहिस्सलाम ने मोमिनीन के गिर्द एक दायरा खींच दिया था। उस दायरे के अंदर वही तेज़ और हलाक करने वाली हवा निहायत ठंडी, पुरसुकून और नर्मी की नसीम बनकर चलती रही, जबकि बाहर उसने पूरी क़ौम को नेस्त-ओ-नाबूद कर दिया। इसके बाद हज़रत हूद डेढ़ सौ (150) साल तक मोमिनीन के दरमियान बा-हयात रहे।
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