Transliteration: (Wa laqad ahlaknaa ma hawlakum minal quraa wa sarrafnal Aayaati la'allahum yarji'oon)
"और बेशक हमने तुम्हारे इर्द-गिर्द की बस्तियों को हलाक कर दिया [77], और हमने तरह-तरह से निशानियाँ फेर-फेर कर बयान कीं ताकि वे रुजूअ़ लाएं [78]।"
अरब के तिजारती रास्तों पर क़ौम-ए-समूद (हिज्र), क़ौम-ए-लूत (सदूम) और क़ौम-ए-आद की वीरान बस्तियाँ मौजूद थीं जिन्हें देखकर अहल-ए-मक्का को सबक़ लेना चाहिए था।
अल्लाह तआला ने तरह-तरह की नसीहतें और निशानियाँ भेजीं ताकि लोग तौबा करके सीधे रास्ते पर आ जाएं, मगर जब वे बाज़ न आए तो अज़ाब लाज़िम हो गया।
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