कुरान - 46:27 सूरह अल-अहक़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
وَلَقَدۡ أَهۡلَكۡنَا مَا حَوۡلَكُم مِّنَ ٱلۡقُرَىٰ وَصَرَّفۡنَا ٱلۡأٓيَٰتِ لَعَلَّهُمۡ يَرۡجِعُونَ

Transliteration: (Wa laqad ahlaknaa ma hawlakum minal quraa wa sarrafnal Aayaati la'allahum yarji'oon)

और बेशक हमने तुम्हारे इर्द-गिर्द की बस्तियों को हलाक कर दिया [77], और हमने तरह-तरह से निशानियाँ फेर-फेर कर बयान कीं ताकि वे रुजूअ़ लाएं [78]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहक़ाफ़ आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहक़ाफ़ तफ़सीर - आयत 27

"और बेशक हमने तुम्हारे इर्द-गिर्द की बस्तियों को हलाक कर दिया [77], और हमने तरह-तरह से निशानियाँ फेर-फेर कर बयान कीं ताकि वे रुजूअ़ लाएं [78]।"

[77] मक्के के अतराफ़ की तबाह शुदा बस्तियाँ

अरब के तिजारती रास्तों पर क़ौम-ए-समूद (हिज्र), क़ौम-ए-लूत (सदूम) और क़ौम-ए-आद की वीरान बस्तियाँ मौजूद थीं जिन्हें देखकर अहल-ए-मक्का को सबक़ लेना चाहिए था।

[78] मुसलसल निशानियों और तंबीहात का मक़सद

अल्लाह तआला ने तरह-तरह की नसीहतें और निशानियाँ भेजीं ताकि लोग तौबा करके सीधे रास्ते पर आ जाएं, मगर जब वे बाज़ न आए तो अज़ाब लाज़िम हो गया।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now