कुरान - 46:28 सूरह अल-अहक़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
فَلَوۡلَا نَصَرَهُمُ ٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُواْ مِن دُونِ ٱللَّهِ قُرۡبَانًا ءَالِهَةَۢۖ بَلۡ ضَلُّواْ عَنۡهُمۡۚ وَذَٰلِكَ إِفۡكُهُمۡ وَمَا كَانُواْ يَفۡتَرُونَ

Transliteration: (Falaw laa nasarahumul lazeenat takhazoo min doonil laahi qurbaanan aalihatam bal dalloo 'anhum' wa zaalika ifkuhum wa maa kaanoo yaftaroon)

तो उन (माबूदों) ने उनकी मदद क्यों न की जिन्हें उन्होंने अल्लाह के सिवा क़ुर्ब हासिल करने के लिए माबूद बना रखा था [79]? बल्कि वे उनसे गुम हो गए; और यह उनका झूठा दावा और बोहतान था जो वे घड़ा करते थे [80]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहक़ाफ़ आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहक़ाफ़ तफ़सीर - आयत 28

"तो उन (माबूदों) ने उनकी मदद क्यों न की जिन्हें उन्होंने अल्लाह के सिवा क़ुर्ब हासिल करने के लिए माबूद बना रखा था [79]? बल्कि वे उनसे गुम हो गए; और यह उनका झूठा दावा और बोहतान था जो वे घड़ा करते थे [80]!"

[79] मुसीबत के वक़्त बुतों की लाचारी

मुशरिकीन कहते थे कि ये बुत हमें अल्लाह के क़रीब करते हैं। मगर जब अज़ाब आया तो न कोई बुत काम आया और न ही कोई उनकी मदद कर सका।

[80] बोहतान का पर्दाफ़ाश

उनका यह अक़ीदा कि बुत बिगड़ी बना सकते हैं, महज़ उनका अपना घड़ा हुआ झूठा बोहतान था जो अज़ाब आते ही तार-तार हो गया।

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