कुरान - 46:30 सूरह अल-अहक़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
قَالُواْ يَٰقَوۡمَنَآ إِنَّا سَمِعۡنَا كِتَٰبًا أُنزِلَ مِنۢ بَعۡدِ مُوسَىٰ مُصَدِّقٗا لِّمَا بَيۡنَ يَدَيۡهِ يَهۡدِيٓ إِلَى ٱلۡحَقِّ وَإِلَىٰ طَرِيقٖ مُّسۡتَقِيمٖ

Transliteration: (Qaaloo yaa qawmanaaa innaa sami'naa Kitaaban unzila mim ba'di Moosa musaddiqal limaa baina yadihi yahdeee ilal haqqi wa ilaa Tareeqim Mustaqeem)

उन्होंने कहा: "ऐ हमारी क़ौम! बेशक हमने एक ऐसी किताब सुनी है [84] जो मूसा के बाद नाज़िल की गई [85], जो अपने से पहले की किताबों की तस्दीक़ फ़रमाती है [86], जो हक़ की तरफ़ और सीधे रास्ते [87] की तरफ़ रहनुमाई करती है"। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहक़ाफ़ आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहक़ाफ़ तफ़सीर - आयत 30

"उन्होंने कहा: 'ऐ हमारी क़ौम! बेशक हमने एक ऐसी किताब सुनी है [84] जो मूसा के बाद नाज़िल की गई [85], जो अपने से पहले की किताबों की तस्दीक़ फ़रमाती है [86], जो हक़ की तरफ़ और सीधे रास्ते [87] की तरफ़ रहनुमाई करती है'।"

[84-85] हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का हवाला

वे जिन्नात हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की शरीअत से वाक़िफ़ थे, इसलिए उन्होंने अपनी क़ौम से फ़रमाया कि हमने हज़रत मूसा के बाद नाज़िल होने वाली यह अज़ीम किताब (क़ुरआन-ए-पाक) सुनी है। तौरात की तरह यह किताब भी अहकाम और शरीअत पर मुश्तमिल है।

[86-87] हक़ और सीधे रास्ते की हिदायत

यह मुक़द्दस किताब पिछली किताबों की तस्दीक़ करती है और इंसान व जिन्न को तौहीद, सच्चाई और जन्नत के सीधे रास्ते की तरफ़ ले जाती है।

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