Transliteration: (Yaa qawmanaaa ajeeboo daa'iyal laahi wa aaminoo bihee yaghfir lakum min zunoobikum wa yujirkum min 'azaabin aleem)
"'ऐ हमारी क़ौम! अल्लाह के दाई (मुहम्मद रसूलुल्लाह ﷺ) की बात क़बूल करो [88] और उन पर ईमान लाओ, ताकि वह तुम्हारे गुनाह बख़्श दे [89] और तुम्हें दर्दनाक अज़ाब से बचा ले [90]'।"
जिन्नों ने अपनी क़ौम से पुकार कर कहा कि अल्लाह के सच्चे दाई यानी हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की दावत को लब्बैक कहो। हुज़ूर ﷺ अल्लाह की तरफ़ बुलाने वाले अज़ीम पैग़म्बर हैं।
जो शख़्स या जिन्न हुज़ूर ﷺ पर ईमान ले आएगा, अल्लाह उसके गुनाहों को माफ़ फ़रमा देगा और उसे दोज़ख़ के दर्दनाक अज़ाब से बचा लेगा। इससे साबित हुआ कि ईमान ही नजात की बुनियादी शर्त है।
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