कुरान - 46:33 सूरह अल-अहक़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
أَوَلَمۡ يَرَوۡاْ أَنَّ ٱللَّهَ ٱلَّذِي خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَلَمۡ يَعۡيَ بِخَلۡقِهِنَّ بِقَٰدِرٍ عَلَىٰٓ أَن يُحۡـِۧيَ ٱلۡمَوۡتَىٰۚ بَلَىٰٓۚ إِنَّهُۥ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ

Transliteration: (Awalam yaraw annal laahal lazee khalaqas samaawaati wal arda wa lam ya'ya bikhal qihinna biqaadirin 'alaaa aiyuhyiyal mawtaa; balaaa innahoo 'alaa kulli shai'in Qadeer)

क्या उन्होंने नहीं देखा कि जिस अल्लाह ने आसमानों और ज़मीन को पैदा फ़रमाया और उनके बनाने से न थका, क्या वह इस बात पर क़ादिर नहीं कि मुर्दों को ज़िंदा कर दे [92]? क्यों नहीं! बेशक वह हर चीज़ पर क़ादिर [93] है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहक़ाफ़ आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहक़ाफ़ तफ़सीर - आयत 33

"क्या उन्होंने नहीं देखा कि जिस अल्लाह ने आसमानों और ज़मीन को पैदा फ़रमाया और उनके बनाने से न थका, क्या वह इस बात पर क़ादिर नहीं कि मुर्दों को ज़िंदा कर दे [92]? क्यों नहीं! बेशक वह हर चीज़ पर क़ादिर [93] है।"

[92] अक़्ली दलील से क़ियामत का सुबूत

जिस क़ादिर-ए-मुतलक़ ने बिना किसी मिसाल के इतने वसीअ आसमानों और ज़मीन को पैदा फ़रमाया और वह थका भी नहीं, उसके लिए सड़ी-गली हड्डियों को दोबारा ज़िंदा करना तो और भी आसान है। मुशरिकीन जब तख़लीक़-ए-कायनात को मानते हैं तो मुर्दों के ज़िंदा होने पर शक क्यों करते हैं?

[93] क़ुदरत-ए-इलाही का दायरा

अल्लाह तआला तमाम मुमकिनात (संभव चीज़ों) पर कामिल क़ुदरत रखता है। क़ियामत का बरपा होना मुमकिन है और अल्लाह के वादे के मुताबिक़ बिल्कुल सच और यक़ीनी है।

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