Transliteration: (Awalam yaraw annal laahal lazee khalaqas samaawaati wal arda wa lam ya'ya bikhal qihinna biqaadirin 'alaaa aiyuhyiyal mawtaa; balaaa innahoo 'alaa kulli shai'in Qadeer)
"क्या उन्होंने नहीं देखा कि जिस अल्लाह ने आसमानों और ज़मीन को पैदा फ़रमाया और उनके बनाने से न थका, क्या वह इस बात पर क़ादिर नहीं कि मुर्दों को ज़िंदा कर दे [92]? क्यों नहीं! बेशक वह हर चीज़ पर क़ादिर [93] है।"
जिस क़ादिर-ए-मुतलक़ ने बिना किसी मिसाल के इतने वसीअ आसमानों और ज़मीन को पैदा फ़रमाया और वह थका भी नहीं, उसके लिए सड़ी-गली हड्डियों को दोबारा ज़िंदा करना तो और भी आसान है। मुशरिकीन जब तख़लीक़-ए-कायनात को मानते हैं तो मुर्दों के ज़िंदा होने पर शक क्यों करते हैं?
अल्लाह तआला तमाम मुमकिनात (संभव चीज़ों) पर कामिल क़ुदरत रखता है। क़ियामत का बरपा होना मुमकिन है और अल्लाह के वादे के मुताबिक़ बिल्कुल सच और यक़ीनी है।
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