कुरान - 46:34 सूरह अल-अहक़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
وَيَوۡمَ يُعۡرَضُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ عَلَى ٱلنَّارِ أَلَيۡسَ هَٰذَا بِٱلۡحَقِّۖ قَالُواْ بَلَىٰ وَرَبِّنَاۚ قَالَ فَذُوقُواْ ٱلۡعَذَابَ بِمَا كُنتُمۡ تَكۡفُرُونَ

Transliteration: (Wa Yawma yu'radul lazeena kafaroo 'alan naari alaisa haaza bil haqq; qaaloo balaa wa Rabbinaa; qaala fazooqul 'azaaba bimaa kuntum takfuroon)

और जिस दिन काफ़िर लोग आग के सामने लाए जाएंगे, (उनसे पूछा जाएगा): "क्या यह हक़ नहीं है [94]?" वे कहेंगे: "क़सम है हमारे रब की! क्यों नहीं (यह बिल्कुल हक़ है)"। फ़रमाया जाएगा: "तो अब अज़ाब का मज़ा चखो अपने कुफ़्र के बदले [95]"। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अहक़ाफ़ आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अहक़ाफ़ तफ़सीर - आयत 34

"और जिस दिन काफ़िर लोग आग के सामने लाए जाएंगे, (उनसे पूछा जाएगा): 'क्या यह हक़ नहीं है [94]?' वे कहेंगे: 'क़सम है हमारे रब की! क्यों नहीं (यह बिल्कुल हक़ है)'। फ़रमाया जाएगा: 'तो अब अज़ाब का मज़ा चखो अपने कुफ़्र के बदले [95]'।"

[94] ज़िल्लत-आमेज़ इक़रार

जब काफ़िरों को जहन्नम के किनारे खड़ा किया जाएगा तो फ़रिश्ते उनसे डांटते हुए पूछेंगे कि बताओ जिस अज़ाब का तुम दुनिया में मज़ाक़ उड़ाते थे क्या वह सच है या नहीं? उस वक़्त वे रब की क़सम खाकर अपने जुर्म का इक़रार करेंगे, मगर उस वक़्त का इक़रार उन्हें कोई फ़ायदा न देगा।

[95] कुफ़्र की दायमी सज़ा

उन्हें साफ़ फ़रमा दिया जाएगा कि यह दायमी अज़ाब तुम्हारे कुफ़्र का बदला है। काफ़िर हमेशा जहन्नम में जलेंगे, जबकि गुनहगार मोमिन अपनी सज़ा भुगत कर या शफ़ाअत के ज़रिए आख़िरकार जहन्नम से निकाल लिए जाएंगे।

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