Transliteration: (Zaalikumul laahu Rabbukum laaa ilaaha illaa huwa khaaliqu kulli shai'in fa'budooh; wa huwa 'alaa kulli shai'inw Wakeel)
वही सारी मख़लूक़ का अस्ल पैदा करने वाला है। हर मख़लूक़ की रोज़ी, उम्र और अमल उसके इख़्तियार में हैं। इसके बावजूद क़ुरआन ने ईमान वालों को एहतियात बरतने और वसीला अपनाने का हुक्म दिया है — जैसे ज़रूरत में डॉक्टर या हुकूमत से मशवरा लेना। औलिया या अम्बिया से जायज़ तरीक़े से मदद या शफ़ाअत चाहना तवक्कुल के खिलाफ़ नहीं, बल्कि अल्लाह के बनाए हुए ज़रिया का हिस्सा है।
अल्लाह हमेशा अपनी मख़लूक़ का निगरान है। इस दुनिया में कोई उसे आंखों से नहीं देख सकता, लेकिन उसकी हिफ़ाज़त हमेशा जारी रहती है। आख़िरत में ईमान वालों को उसे देखने का शरफ़ मिलेगा। क़ुरआन ने इसको मिराज की आयतों और जन्नत वालों के रौशन चेहरों का अपने रब की तरफ़ देखना बयान किया है।
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