कुरान - 6:103 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

103
لَّا تُدۡرِكُهُ ٱلۡأَبۡصَٰرُ وَهُوَ يُدۡرِكُ ٱلۡأَبۡصَٰرَۖ وَهُوَ ٱللَّطِيفُ ٱلۡخَبِيرُ

Transliteration: (Laa tudrikuhul absaaru wa Huwa yudrikul absaara wa huwal Lateeful Khabeer)

आंखें उसे समेट [226] नहीं सकतीं, लेकिन वह सारी आंखों को समेट लेता है। और वह बड़ा लतीफ़ और पूरी तरह ख़बर रखने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 103 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 103 की तफ़्सीर

✅ [226] अल्लाह को निगाहें घेर नहीं सकतीं

यह इंसानी अक़्ल और हवास की हदबंदी की तरफ़ इशारा है। अल्लाह को कोई हिस पूरी तरह घेर या समझ नहीं सकती, क्योंकि वह जिस्म और शक्ल से पाक है। जैसे कोई बर्तन या दीवार चीज़ को घेर लेती है, वैसे हद और सीमा अल्लाह की ज़ात पर लागू नहीं होती। वह जगह और कायम रहने की क़ैद से पाक है, इसलिए ऐसी समझ नामुमकिन है।

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