कुरान - 6:104 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

104
قَدۡ جَآءَكُم بَصَآئِرُ مِن رَّبِّكُمۡۖ فَمَنۡ أَبۡصَرَ فَلِنَفۡسِهِۦۖ وَمَنۡ عَمِيَ فَعَلَيۡهَاۚ وَمَآ أَنَا۠ عَلَيۡكُم بِحَفِيظٖ

Transliteration: (Qad jaaa'akum basaaa'iru mir Rabbikum faman absara falinafsihee wa man 'amiya fa'alaihaa; wa maaa ana 'alaikum bihafeez)

तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ़ से रोशन दलीलें [227] आ चुकी हैं, तो जो देखे वह अपने ही फायदे के लिए देखता है, और जो अंधा बना रहे, वह अपने ही नुकसान के लिए अंधा रहता है, और मैं तुम्हारा निगहबान [228] नहीं हूँ। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 104 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 104 की तफ़्सीर

✅ [227] अल्लाह की रोशन दलीलें इंसानों के फ़ायदे के लिए हैं

इससे मुराद हज़रत मुहम्मद ﷺ के मोज़िज़ात और क़ुरआन की आयतें हैं। दरअसल नबी ﷺ की ज़ात खुद अल्लाह के वजूद और उसके पैग़ाम की ज़िंदा निशानी है। जैसा कि अल्लाह ने फ़रमाया: बेशक तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ़ से एक ख़ुली दलील आ चुकी है (सूरा अन-निसा 4:175)। ये दलीलें रहमत हैं, ताकि सोचने वाले हिदायत पा सकें।

✅ [228] ईमान रोशनी है, गुमराही अंधापन है

क़ुरआन ने हिदायत को रोशनी और देखने से, और गुमराही को अंधापन से तश्बीह दी है। जो हक़ को क़ुबूल करता है, वह अपना फ़ायदा करता है, और जो इंकार करता है, वह अपना नुकसान करता है। नबी का काम सिर्फ़ पैग़ाम पहुंचाना है, ईमान थोपना नहीं। जैसे सूरज को न मानना उसकी रोशनी को कम नहीं करता, वैसे ही नबी ﷺ का इनकार उनकी रिसालत और मक़ाम को कम नहीं करता।

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