कुरान - 6:11 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
قُلۡ سِيرُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ ثُمَّ ٱنظُرُواْ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلۡمُكَذِّبِينَ

Transliteration: (Qul seeroo fil ardi summan zuroo kaifa kaana 'aaqibatul mukazzibeen)

(आप फ़रमा दीजिए ऐ हबीब ﷺ:) "ज़मीन में चलो-फिरो [21], फिर देखो कि झुटलाने वालों का अंजाम क्या हुआ" [22]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 11 की तफ़्सीर

✅ [21] तबाह क़ौमों के खंडहर देखना एक इबरत है

"ज़मीन में चलो-फिरो" का मतलब है —
उन इलाक़ों की सैर करो जहाँ पिछली क़ौमें अल्लाह के अज़ाब का शिकार हुईं,
और जिनके खंडहर आज भी बाक़ी हैं।
यह हुक्म फ़र्ज़ नहीं, बल्कि नसीहत के तौर पर दिया गया है —
ताकि इंसान सोचे, समझे और सबक ले।

✅ [22] सफर के ज़रिए ईमान और अल्लाह का डर मज़बूत होता है

जो लोग अल्लाह की नाफ़रमानी और तकब्बुर में डूबे रहे —
उनका अंत कैसा हुआ, ये देखना
ईमान में पुख़्तगी और अल्लाह के अज़ाब का एहसास पैदा करता है।
इसी तरह, अच्छे बंदों की क़ब्रों या मुक़द्दस जगहों की ज़ियारत भी
मोहब्बत, अदब और अल्लाह की इताअत को मज़बूत करती है।

इसलिए, सबक लेने और रूहानी क़ुर्ब हासिल करने वाला सफर — रहमत का ज़रिया है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now