Transliteration: (Samaaniyata azwaajim minad da'nisnaini wa minal ma'zis nain; qul 'aaazzaka raini harrama amil unsaiyayni ammash tamalat 'alaihi arhaamul unsayayni nabbi 'oonee bi'ilmin in kuntum saadiqeen)
यह आयत भेड़ और बकरी की किस्मों (नर और मादा) का ज़िक्र कर रही है। मुश्रिकों ने बिनाआधार कुछ जानवरों को हराम ठहराया था। अल्लाह उनसे सवाल करता है: क्या तुमने नरों को हराम किया है, या मादाओं को, या उनके पेट में पल रहे बच्चों को? यह सवाल उनके झूठे दावों को बेनक़ाब करता है।
अल्लाह ने साफ़ कर दिया कि इनमें से कोई भी चीज़ हराम नहीं की गई। मुश्रिकों ने अपने मन से पाबंदियाँ बना ली थीं। अल्लाह का हुक्म है: "अगर तुम सच्चे हो तो इल्म और दलील लेकर आओ।" यानी, गुमान और रिवायत हराम ठहराने का आधार नहीं हो सकती।
कोई चीज़ तभी हराम होगी जब उसके लिए क़ुरआन या सुन्नत से साफ़ दलील मौजूद हो। वरना उसका असल हुक्म हलाल ही रहेगा। इसलिए जो लोग किसी चीज़ को हराम ठहराते हैं, उन पर दलील लाना लाज़िमी है, जबकि हलाल मानने वालों को दलील की ज़रूरत नहीं, क्योंकि असल हुक्म ही जायज़ है।
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