Transliteration: (Wa minal ibilis naini wa minal baqaris nain; qul 'aaazzakaraini harrama amil unsayaini ammash tamalat 'alaihi arhaamul unsayaini am kuntum shuhadaaa'a iz wassaakumul laahu bihaazaa; faman azlamu mimmanif taraa 'alal laahi kazibal liyuddillan naasa bighairi 'ilm; innal laaha laa yahdil qawmaz zaalimeen)
यह आयत उन लोगों के बारे में उतरी जिन्होंने अपनी जाहिलाना रस्मों के आधार पर ऊँट और गाय की कुछ किस्मों को हराम ठहरा लिया। नबी ﷺ से कहलवाया गया: क्या हराम होने की वजह नर होना है, या मादा होना, या उनके पेट में पलने वाला बच्चा? यह सवाल उनकी बिनाअधार मनगढ़ंत बातों को उजागर करता है।
अल्लाह मुश्रिकों से पूछता है: क्या तुम वहाँ मौजूद थे जब अल्लाह ने कोई हुक्म दिया? चूँकि न कोई नबी ऐसा कानून लाए और न ही अल्लाह ने कोई हुक्म उतारा, इसलिए उनकी बातें झूठी और बेबुनियाद हैं। किसी चीज़ को अल्लाह की तरफ़ मंसूब करके हराम ठहराना, जबकि अल्लाह ने ऐसा नहीं कहा, सबसे बड़ा झूठ है।
जो लोग अल्लाह पर झूठ गढ़कर लोगों को गुमराह करते हैं, अल्लाह उन्हें हिदायत नहीं देता। हिदायत सिर्फ़ उन्हीं को मिलती है जो सचाई कबूल करने वाले हों। जब तक कोई इंसान झूठ और ज़ुल्म पर डटा रहेगा, वह रहमत और हिदायत से महरूम रहेगा।
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