Transliteration: (Wa 'alal lazeena haadoo harramnaa kulla zee zufurinw wa minal baqari walghanami harramnaa 'alaihim shuhoo mahumaaa illaa maa hamalat zuhooruhumaaa awil hawaayaaa aw makhtalata bi'azm; zaalika jazainaahum bibaghyihim wa innaa la saadiqoon)
यह आयत इस उसूल को बयान करती है कि हर चीज़ हलाल है, जब तक कि उसे वही (क़ुरआन या हदीस) से हराम साबित न कर दिया जाए। किसी चीज़ को हराम ठहराने का हक़ सिर्फ़ अल्लाह को है।
वह जानवर जो अल्लाह का नाम लेकर ज़बह न किया गया हो, बल्कि अपने आप मर जाए, वह हराम है।
सिर्फ़ बहता हुआ ख़ून हराम है, जबकि जमा हुआ ख़ून जैसे कि जिगर और तिल्ली, हलाल हैं।
सूअर का हर हिस्सा नापाक है और हर हाल में हराम है। इसी तरह वह जानवर भी हराम है जिस पर ज़बह के वक़्त अल्लाह के अलावा किसी और का नाम लिया जाए।
अगर कोई इंसान मजबूरी और जान बचाने की हालत में इन हराम चीज़ों में से खा ले, बिना चाहत और हद से आगे बढ़े, तो अल्लाह की मग़फ़िरत और रहमत उस पर है।
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