कुरान - 6:146 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

146
وَعَلَى ٱلَّذِينَ هَادُواْ حَرَّمۡنَا كُلَّ ذِي ظُفُرٖۖ وَمِنَ ٱلۡبَقَرِ وَٱلۡغَنَمِ حَرَّمۡنَا عَلَيۡهِمۡ شُحُومَهُمَآ إِلَّا مَا حَمَلَتۡ ظُهُورُهُمَآ أَوِ ٱلۡحَوَايَآ أَوۡ مَا ٱخۡتَلَطَ بِعَظۡمٖۚ ذَٰلِكَ جَزَيۡنَٰهُم بِبَغۡيِهِمۡۖ وَإِنَّا لَصَٰدِقُونَ

Transliteration: (Wa 'alal lazeena haadoo harramnaa kulla zee zufurinw wa minal baqari walghanami harramnaa 'alaihim shuhoo mahumaaa illaa maa hamalat zuhooruhumaaa awil hawaayaaa aw makhtalata bi'azm; zaalika jazainaahum bibaghyihim wa innaa la saadiqoon)

कह दो: जो कुछ मेरी तरफ़ वही उतारी गई है, उसमें मुझे कोई चीज़ हराम नहीं मिलती [328] खाने वाले पर, मगर वह कि वह मुर्दार हो [329], या बहता हुआ ख़ून [330], या सूअर का गोश्त — क्योंकि वह तो यक़ीनन नापाक है — या वह चीज़ जिस पर ज़बह के वक़्त अल्लाह के सिवा किसी और का नाम लिया गया हो [331]। फिर जो मजबूरी में गिर जाए, बिना चाहत और हद से आगे बढ़े, तो बेशक तुम्हारा रब ग़फ़ूर और रहम वाला है [332]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 146 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 145 की तफ़्सीर

✅ [328] असल हलाल है

यह आयत इस उसूल को बयान करती है कि हर चीज़ हलाल है, जब तक कि उसे वही (क़ुरआन या हदीस) से हराम साबित न कर दिया जाए। किसी चीज़ को हराम ठहराने का हक़ सिर्फ़ अल्लाह को है।

✅ [329] मुर्दार हराम है

वह जानवर जो अल्लाह का नाम लेकर ज़बह न किया गया हो, बल्कि अपने आप मर जाए, वह हराम है।

✅ [330] बहता हुआ ख़ून हराम

सिर्फ़ बहता हुआ ख़ून हराम है, जबकि जमा हुआ ख़ून जैसे कि जिगर और तिल्ली, हलाल हैं।

✅ [331] सूअर और शिर्क वाला ज़बह हराम

सूअर का हर हिस्सा नापाक है और हर हाल में हराम है। इसी तरह वह जानवर भी हराम है जिस पर ज़बह के वक़्त अल्लाह के अलावा किसी और का नाम लिया जाए।

✅ [332] मजबूरी में रुख़्सत

अगर कोई इंसान मजबूरी और जान बचाने की हालत में इन हराम चीज़ों में से खा ले, बिना चाहत और हद से आगे बढ़े, तो अल्लाह की मग़फ़िरत और रहमत उस पर है।

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