Transliteration: (Fa in kazzabooka faqur Rabbukum zoo rahmatinw waasi'atinw wa laa yuraddu ba'suhoo 'anil qawmil mujrimeen)
अल्लाह की रहमत इतनी वसी (विस्तृत) है कि वह लोगों को फ़ौरन अज़ाब नहीं देता, बल्कि उन्हें तौबा और सुधार का मौक़ा देता है। लेकिन जब गुनाह और कुफ़्र पर अड़ जाते हैं, तो अल्लाह का अज़ाब लाज़िमी तौर पर उतरता है। उसकी रहमत देर कर सकती है, मगर अज़ाब से बचाना मुमकिन नहीं, अगर इंसान गुनाह और इंकार से बाज़ न आए।
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