कुरान - 6:147 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

147
فَإِن كَذَّبُوكَ فَقُل رَّبُّكُمۡ ذُو رَحۡمَةٖ وَٰسِعَةٖ وَلَا يُرَدُّ بَأۡسُهُۥ عَنِ ٱلۡقَوۡمِ ٱلۡمُجۡرِمِينَ

Transliteration: (Fa in kazzabooka faqur Rabbukum zoo rahmatinw waasi'atinw wa laa yuraddu ba'suhoo 'anil qawmil mujrimeen)

फिर अगर वे तुम्हें झुटलाएँ, तो कह दो: तुम्हारा रब तो वसी रहमत (बहुत बड़ी रहमत) [337] वाला है, लेकिन उसका अज़ाब गुनाहगार क़ौम से टाला नहीं जा सकता। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 147 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 147 की तफ़्सीर

✅ [337] रहमत की वुसअत और अज़ाब की यक़ीनी हक़ीक़त

अल्लाह की रहमत इतनी वसी (विस्तृत) है कि वह लोगों को फ़ौरन अज़ाब नहीं देता, बल्कि उन्हें तौबा और सुधार का मौक़ा देता है। लेकिन जब गुनाह और कुफ़्र पर अड़ जाते हैं, तो अल्लाह का अज़ाब लाज़िमी तौर पर उतरता है। उसकी रहमत देर कर सकती है, मगर अज़ाब से बचाना मुमकिन नहीं, अगर इंसान गुनाह और इंकार से बाज़ न आए।

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