कुरान - 6:46 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

46
قُلۡ أَرَءَيۡتُمۡ إِنۡ أَخَذَ ٱللَّهُ سَمۡعَكُمۡ وَأَبۡصَٰرَكُمۡ وَخَتَمَ عَلَىٰ قُلُوبِكُم مَّنۡ إِلَٰهٌ غَيۡرُ ٱللَّهِ يَأۡتِيكُم بِهِۗ ٱنظُرۡ كَيۡفَ نُصَرِّفُ ٱلۡأٓيَٰتِ ثُمَّ هُمۡ يَصۡدِفُونَ

Transliteration: (Qul ara'aitum in akhazal laahu sam'akum wa absaarakum wa khatama 'alaa quloobikum man ilaahun ghairul laahi ya'teekum bih; unzur kaifa nusarriful Aayaati summa hum yasdifoon)

कहो (ऐ नबी), “क्या तुमने सोचा है कि अगर अल्लाह तुम्हारी सुनने और देखने की शक्तियाँ छीन ले, और तुम्हारे दिलों पर मुहर लगा दे, तो अल्लाह के सिवा कौन है जो तुम्हें ये सब वापस दे सकता है? [91] देखो, हम कैसे तरह-तरह से निशानियाँ बयान करते हैं, फिर भी वे मुँह फेर लेते हैं।” [92] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 46 की तफ़्सीर

✅ [91] जब अल्लाह हिदायत छीन ले

यह आयत इस हक़ीक़त को बयान करती है कि अगर अल्लाह इंसान से उसकी सुनने, देखने, और समझने की क़ुव्वत छीन ले, तो दुनिया की कोई ताक़त — ना कोई वली, ना पीर, और ना हकीम — उसे वापस नहीं कर सकता।

  • इंसान दिखने में देख और सुन रहा हो सकता है, लेकिन अगर उसका दिल सील हो गया, तो वह हक़ को कभी नहीं पहचान सकता।
  • ये बात हक़ीक़ी (literal) और मजाज़ी (metaphorical) दोनों तौर पर सही है — हिदायत और इद्राक सिर्फ़ अल्लाह के इख़्तियार में है।

✅ [92] ज़रिया बेअसर, जब अल्लाह ना चाहे

अल्लाह अपने निशानियों को अलग-अलग अंदाज़ में पेश करता है — कहीं क़ुरआन के ज़रिये, कहीं क़ुदरत के नज़ारों से, कहीं अज़ाब और इनाम की मिसालों से।
लेकिन जिनके दिलों पर परदा है, वे हर निशानी को देख कर भी मुंह मोड़ लेते हैं।

  • इससे ये सबक़ मिलता है कि चाहे डॉक्टर की दवा हो, या औलिया की दुआ, जब तक अल्लाह ना चाहे, कोई फायदा नहीं पहुँच सकता।
  • हक़ीक़त में शिफा, फायदा और हिदायत — सब कुछ सिर्फ़ अल्लाह की मर्ज़ी से है।

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