Transliteration: (Qul ara'aitum in akhazal laahu sam'akum wa absaarakum wa khatama 'alaa quloobikum man ilaahun ghairul laahi ya'teekum bih; unzur kaifa nusarriful Aayaati summa hum yasdifoon)
यह आयत इस हक़ीक़त को बयान करती है कि अगर अल्लाह इंसान से उसकी सुनने, देखने, और समझने की क़ुव्वत छीन ले, तो दुनिया की कोई ताक़त — ना कोई वली, ना पीर, और ना हकीम — उसे वापस नहीं कर सकता।
अल्लाह अपने निशानियों को अलग-अलग अंदाज़ में पेश करता है — कहीं क़ुरआन के ज़रिये, कहीं क़ुदरत के नज़ारों से, कहीं अज़ाब और इनाम की मिसालों से।
लेकिन जिनके दिलों पर परदा है, वे हर निशानी को देख कर भी मुंह मोड़ लेते हैं।
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