कुरान - 6:58 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

58
قُل لَّوۡ أَنَّ عِندِي مَا تَسۡتَعۡجِلُونَ بِهِۦ لَقُضِيَ ٱلۡأَمۡرُ بَيۡنِي وَبَيۡنَكُمۡۗ وَٱللَّهُ أَعۡلَمُ بِٱلظَّـٰلِمِينَ

Transliteration: (Qul law anna 'indee maa tasta'jiloona bihee laqudiyal amru bainee wa bainakum; wallaahu a'lamu bizzaalimeen)

कह दीजिए: अगर वह चीज़ मेरे पास होती जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे हो, तो मेरे और तुम्हारे बीच मामला फ़ैसला कर दिया गया होता [118]। और अल्लाह ज़ालिमों को अच्छी तरह जानता है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 58 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरा अल-अनआम – आयत 58

✅ [118] अगर फ़ैसला करना नबी ﷺ के हाथ में होता

कुफ़्फ़ार अज़ाब की जल्दी मचाते थे और नबी ﷺ से कहते थे कि अगर आप सच्चे हैं तो वह अज़ाब ला दिखाइए। इस आयत में जवाब मिला कि अगर यह इख़्तियार नबी ﷺ को दिया गया होता तो ऐसे दुश्मनों से ज़मीन को पहले ही पाक कर दिया जाता और फ़ैसला फ़ौरन हो जाता। नबी ﷺ का मिज़ाज अल्लाह के फ़रमान के मुताबिक़ है — "काफ़िरों पर सख़्त और आपस में रहमदिल" (सूरा 48:29)। लेकिन अज़ाब का हुक्म सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है। वह ज़ालिमों को पूरी तरह जानता है और उसका इंसाफ़ बिना वजह कभी देर से नहीं आता।

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