कुरान - 6:60 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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وَهُوَ ٱلَّذِي يَتَوَفَّىٰكُم بِٱلَّيۡلِ وَيَعۡلَمُ مَا جَرَحۡتُم بِٱلنَّهَارِ ثُمَّ يَبۡعَثُكُمۡ فِيهِ لِيُقۡضَىٰٓ أَجَلٞ مُّسَمّٗىۖ ثُمَّ إِلَيۡهِ مَرۡجِعُكُمۡ ثُمَّ يُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Wa Huwal lazee yatawaf faakum billaili wa ya'lamu maa jarahtum binnahaari summa yab'asukum feehee liyuqdaaa ajalum musamman summa ilaihi marji'ukum summa yunabbi 'ukum bimaa kuntum ta'maloon)

कह दीजिए – अगर वह चीज़ मेरे पास होती जिसके लिए तुम जल्दी कर रहे हो, तो मेरे और तुम्हारे बीच का मामला निपटा दिया जाता। और अल्लाह ज़ालिमों को भली-भांति जानता है। [118] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 60 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरा अल-अनआम – आयत 58

✅ अगर फैसला मेरे हाथ में होता तो गुनाहगार मिटा दिए जाते [118]

काफ़िर लोग अज़ाब की जल्दी कर रहे थे और नबी ﷺ से कहते थे कि अगर आप सच्चे हैं तो अज़ाब ले आइए। इस आयत में जवाब दिया गया कि अगर यह मामला नबी ﷺ के इख़्तियार में होता तो धरती को ऐसे दुश्मनों से पहले ही पाक कर दिया जाता और फ़ैसला फ़ौरन हो जाता। लेकिन चूँकि यह पूरा मामला सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है, इसलिए नबी ﷺ उसके हुक्म के इंतज़ार में रहते हैं। अल्लाह ज़ालिमों को पूरी तरह जानता है और उसका इंसाफ़ बिना वजह कभी देर नहीं करता।

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