Transliteration: (Summa ruddooo ilallaahi mawlaahumul haqq; alaa lahul hukmu wa Huwa asra'ul haasibeen)
यह आयत बताती है कि मौत के बाद रूहें फ़ौरन अपने असल और आख़िरी मालिक अल्लाह के सामने पेश की जाती हैं। हदीस में आता है कि रूह को पहले अल्लाह के दरबार में ले जाया जाता है, फिर क़ब्र में वापस किया जाता है। असल वापसी धरती की नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ़ है।
"हिसाब लेने में सबसे तेज़" का मतलब है कि क़यामत के दिन अल्लाह तमाम मख़लूक का हिसाब दुनिया के आधे दिन (करीब चार घंटे) में पूरा कर देगा। उस दिन का बाक़ी हिस्सा नबी ﷺ की तअज़ीम और उनके ऊँचे मक़ाम को सबके सामने ज़ाहिर करने में गुज़रेगा, जैसा कि सूरा 17:79 में है — "तुम्हारा रब तुम्हें उस मुक़ाम पर क़ायम करेगा जहाँ सब तुम्हारी तारीफ़ करेंगे"। यह अल्लाह की इंसाफ़ की तेज़ी और अपने महबूब ﷺ के लिए रखी गई बड़ी इज़्ज़त दोनों को बयान करता है।
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