कुरान - 6:61 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

61
وَهُوَ ٱلۡقَاهِرُ فَوۡقَ عِبَادِهِۦۖ وَيُرۡسِلُ عَلَيۡكُمۡ حَفَظَةً حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءَ أَحَدَكُمُ ٱلۡمَوۡتُ تَوَفَّتۡهُ رُسُلُنَا وَهُمۡ لَا يُفَرِّطُونَ

Transliteration: (Wa huwal qaahiru fawqa 'ibaadihee wa yursilu 'alaikum hafazatan hattaaa izaa jaaa'a ahadakumul mawtu tawaffathu rusulunaa wa hum laa yufarritoon)

तो कह दीजिए: यदि वह चीज़, जिसके लिए तुम जल्दी कर रहे हो, मेरे पास होती, तो मेरे और तुम्हारे बीच फ़ैसला कर दिया जाता [118] और अल्लाह ज़ालिमों को खूब जानता है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 61 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरा अल-अनआम – आयत 58

✅ [118] अगर मामला नबी ﷺ के हाथ में होता, तो दोषियों का अंत हो जाता

काफ़िर लोग अज़ाब को जल्दी लाने की जिद कर रहे थे और कहते थे कि अगर आप सच हैं तो हमें तुरंत अज़ाब ला कर दिखाइए। इस आयत में जवाब दिया गया कि अगर यह मामला नबी ﷺ के इख़्तियार में होता, तो ज़मीन ऐसे दुश्मनों से पहले ही पाक कर दी जाती और फ़ैसला फ़ौरन हो जाता। यह नबी ﷺ के उस स्वभाव को दर्शाता है—काफ़िरों पर सख़्त और ईमान वालों पर नरम (सूरा 48:29)। लेकिन चूँकि ऐसे मामलों का पूरा इख़्तियार सिर्फ़ अल्लाह के पास है, नबी ﷺ अल्लाह के हुक्म का इंतज़ार करते हैं। अल्लाह ज़ालिमों से पूरी तरह वाक़िफ़ है और उसका इंसाफ़ बिना हिकमत के कभी देर नहीं करता।

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