कुरान - 6:63 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

63
قُلۡ مَن يُنَجِّيكُم مِّن ظُلُمَٰتِ ٱلۡبَرِّ وَٱلۡبَحۡرِ تَدۡعُونَهُۥ تَضَرُّعٗا وَخُفۡيَةٗ لَّئِنۡ أَنجَىٰنَا مِنۡ هَٰذِهِۦ لَنَكُونَنَّ مِنَ ٱلشَّـٰكِرِينَ

Transliteration: (Qul mai yunajjeekum min zulumaatil barri walbahri tad'oonahoo tadarru'anw wa khufyatal la'in anjaanaa min haazihee lanakoonanna minash shaakireen)

कहो, "कौन तुम्हें ज़मीन और समुंदर की तारिकियों से निजात देता है, जब तुम उसे गुहार लगाते हो गिरगिराकर और चुपके [128], यह कहते हुए — अगर उसने हमें इससे बचा लिया, तो हम ज़रूर शुक्रगुज़ारों में से होंगे?" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 63 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरा अल-अनआम – आयत 63

✅ [128] मुसीबत में अस्थायी सच्चाई

यह आयत उन काफ़िरों के बारे में है जो खतरनाक जंगलों या तूफ़ानी समुंदरों में फँसकर अल्लाह को सच्चाई और गुप्त रूप से पुकारते थे, और वादा करते थे कि अगर बचा लिए गए, तो शुक्रगुज़ार बनेंगे। मगर निजात मिलने के बाद वे फिर कुफ़्र की तरफ लौट जाते और अपने वादे को भूल जाते। यहाँ उनकी दुआ की निंदा नहीं, बल्कि वादाख़िलाफ़ी की निंदा की गई है। यह शर्तिया ईमान के नफ़ाक़ को बयान करता है कि असली शुक्र बचाव के बाद भी कायम रहना चाहिए, न कि आसानी पाते ही मिट जाना चाहिए।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now