कुरान - 6:64 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

64
قُلِ ٱللَّهُ يُنَجِّيكُم مِّنۡهَا وَمِن كُلِّ كَرۡبٖ ثُمَّ أَنتُمۡ تُشۡرِكُونَ

Transliteration: (Qulil laahu yunajjjeekum minhaa wa min kulli karbin summa antum tushrikoon)

कहो, "अल्लाह ही तुम्हें इससे और हर तरह की परेशानी से निजात देता है, फिर भी तुम उसके साथ शरीक ठहराते हो [129]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 64 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरा अल-अनआम – आयत 64

✅ [129] काफ़िरों की दुआ भी क़बूल हो सकती है

यह आयत बताती है कि सिर्फ़ अल्लाह ही हर तरह की मुसीबत से बचाने वाला है, यहाँ तक कि काफ़िरों को भी, जो संकट के वक़्त अस्थायी तौर पर उसी को पुकारते हैं। कभी-कभी उनकी सच्ची पुकार को अल्लाह क़बूल भी कर लेता है, जैसे शैतान की लंबी उम्र की दुआ क़बूल की गई थी। मगर निजात मिलने के बाद वे फिर शिर्क की तरफ लौट जाते हैं। असल कमी दुआ में नहीं, बल्कि बचाए जाने के बाद ईमान और शुक्रगुज़ारी के न होने में है।

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