कुरान - 6:66 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

66
وَكَذَّبَ بِهِۦ قَوۡمُكَ وَهُوَ ٱلۡحَقُّۚ قُل لَّسۡتُ عَلَيۡكُم بِوَكِيلٖ

Transliteration: (Wa kaz zaba bihee qawmuka wa huwal haqq; qul lastu'alaikum biwakeel)

और तुम्हारी क़ौम ने इसे झुठला दिया, हालाँकि यह हक़ है। कह दो, "मैं तुम्हारा निगरान नहीं हूँ [132]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 66 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरा अल-अनआम – आयत 66

✅ [132] रसूल का ज़िम्मा सिर्फ़ पैग़ाम पहुँचना है

इस आयत में बताया गया है कि हक़ साफ़ होने के बावजूद लोगों ने उसे जानबूझकर झुठला दिया। नबी ﷺ से कहा गया कि वह यह ऐलान करें कि उनकी हिदायत की ज़िम्मेदारी आपके ऊपर नहीं है। आपका काम सिर्फ़ पैग़ाम पहुँचना है, ईमान लाना या गुमराह होना — यह उनका अपना चुनाव है, और इसका हिसाब वही देंगे।

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