Transliteration: (Wa maa 'alal lazeena yattaqoona min hisaabihim min shai'inw wa laakin zikraa la'allahum yattaqoon)
इस आयत में स्पष्ट किया गया है कि परहेज़गार लोग जब दावत या बहस के लिए बैठते हैं, तो काफ़िरों के गुनाहों का हिसाब उनके ऊपर नहीं होगा। उनका फ़र्ज़ है कि हिकमत से पैग़ाम पहुँचाएँ और लोगों को हक़ की याद दिलाएँ। गैर-मुसलमानों के बीच दावत-ए-हक़ के लिए बैठना न सिर्फ़ जायज़ है, बल्कि यह रूहानी फ़ायदे और दिलों की बیدारी का ज़रिया बन सकता है।
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