कुरान - 6:69 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

69
وَمَا عَلَى ٱلَّذِينَ يَتَّقُونَ مِنۡ حِسَابِهِم مِّن شَيۡءٖ وَلَٰكِن ذِكۡرَىٰ لَعَلَّهُمۡ يَتَّقُونَ

Transliteration: (Wa maa 'alal lazeena yattaqoona min hisaabihim min shai'inw wa laakin zikraa la'allahum yattaqoon)

और परहेज़गारों पर कोई हिसाब नहीं है, मगर यह तो एक नसीहत है, ताकि वे होशियार हो जाएँ [137]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 69 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरा अल-अनआम – आयत 69

✅ [137] हक़ बोलने पर परहेज़गारों पर इल्ज़ाम नहीं

इस आयत में स्पष्ट किया गया है कि परहेज़गार लोग जब दावत या बहस के लिए बैठते हैं, तो काफ़िरों के गुनाहों का हिसाब उनके ऊपर नहीं होगा। उनका फ़र्ज़ है कि हिकमत से पैग़ाम पहुँचाएँ और लोगों को हक़ की याद दिलाएँ। गैर-मुसलमानों के बीच दावत-ए-हक़ के लिए बैठना न सिर्फ़ जायज़ है, बल्कि यह रूहानी फ़ायदे और दिलों की बیدारी का ज़रिया बन सकता है।

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