कुरान - 6:70 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

70
وَذَرِ ٱلَّذِينَ ٱتَّخَذُواْ دِينَهُمۡ لَعِبٗا وَلَهۡوٗا وَغَرَّتۡهُمُ ٱلۡحَيَوٰةُ ٱلدُّنۡيَاۚ وَذَكِّرۡ بِهِۦٓ أَن تُبۡسَلَ نَفۡسُۢ بِمَا كَسَبَتۡ لَيۡسَ لَهَا مِن دُونِ ٱللَّهِ وَلِيّٞ وَلَا شَفِيعٞ وَإِن تَعۡدِلۡ كُلَّ عَدۡلٖ لَّا يُؤۡخَذۡ مِنۡهَآۗ أُوْلَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ أُبۡسِلُواْ بِمَا كَسَبُواْۖ لَهُمۡ شَرَابٞ مِّنۡ حَمِيمٖ وَعَذَابٌ أَلِيمُۢ بِمَا كَانُواْ يَكۡفُرُونَ

Transliteration: (Wa zaril lazeenat takhazoo deenahum la'ibanwwa lahwanw wa gharrat humul ha yaatud dunyaa; wa zakkir biheee an tubsala nafsum bimaa kasabat laisa lahaa min doonil laahi waliyyunw wa laa shafee'unw wa in ta'dil kulla 'adlil laa yu'khaz minhaa; ulaaa 'ikal lazeena ubsiloo bimaa kasaboo lahum sharaabum min hameeminw wa 'azaabun aleemum bimaa kaanoo yakkfuroon)

और छोड़ दो उन्हें, जिन्होंने अपने दीन को मज़ाक़ और खेल बना लिया [138], और जिनको दुनिया की ज़िंदगी ने धोखे में डाल दिया है। और उन्हें क़ुरआन के ज़रिए नसीहत करो [139], कहीं ऐसा न हो कि कोई जान अपने किए के बदले में पकड़ ली जाए। उसके लिए अल्लाह के सिवा न कोई हामी होगा और न कोई सिफ़ारिशी [140]। और अगर वह हर तरह का मुआवज़ा भी पेश करे, तो उससे क़बूल नहीं किया जाएगा। यही लोग हैं जिन्हें उनके अमल के बदले में पकड़ा जाएगा [141]। इनके लिए उबलता हुआ पानी पीने को होगा और दर्दनाक अज़ाब होगा, उनके कुफ़्र की वजह से [142]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 70 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरा अल-अनआम – आयत 70

✅ [138] दीन का मज़ाक़ उड़ाने वालों से किनारा

इस आयत में हुक्म है कि उन लोगों से ताल्लुक़ तोड़ लिया जाए जो दीन को मज़ाक़ और खेल समझते हैं और जिन्हें दुनिया ने धोखे में डाल रखा है। ऐसे लोगों से माल, सोशल और दीन के रिश्ते तोड़ना ज़रूरी है — जैसे निकाह, शिरकत, विरासत और जनाज़ा में हिस्सा लेना — यह सिर्फ़ काफ़िरों के बारे में है, गुनाहगार मुसलमानों के लिए नहीं, जिनके लिए अस्थायी बहिष्कार या सच्ची नसीहत का तरीका अपनाया जा सकता है अगर इस्लाह की उम्मीद हो।

✅ [139] इनकार के बावजूद दावत जारी रखना

भले ही इनकार पक्का मालूम हो, फिर भी क़ुरआन दावत देने की हिदायत देता है। नसीहत कभी बेकार नहीं जाती, वह किसी के दिल में सोच जगा सकती है। यहाँ तक कि जिन काफ़िरों के बारे में पहले से बता दिया गया था कि वे ईमान नहीं लाएँगे, उन्हें भी आख़िर तक रहमत और दावत का पैग़ाम दिया गया।

✅ [140] काफ़िरों के लिए न कोई सिफ़ारिश और न बचाव

इस हिस्से में साफ़ बताया गया है कि काफ़िरों के लिए न तो कोई सिफ़ारिश है, न ही बचाने वाला। उनके सारे मुआवज़े या नेकी का दावा भी क़बूल नहीं होगा। हाँ, मुसलमानों के लिए सिफ़ारिश का सबूत क़ुरआन और अमल से मिलता है, जैसे सलातुल-जनाज़ा में रहमत की दुआ।

✅ [141] नेक अमल भी रद्द हो जाना और सज़ा बनना

काफ़िर न सिर्फ़ क़बूल होने से महरूम रहेंगे, बल्कि उनके अच्छे अमल भी रद्द हो जाएँगे। कुछ उलमा के मुताबिक़, उनकी नेकियाँ मुसलमानों के गुनाहों का मुआवज़ा बन सकती हैं। यह अल्लाह की इंसाफ़-पसंदी है कि कुफ़्र का बोझ सारी अच्छाइयों को दबा देता है।

✅ [142] उबलता पानी और दर्दनाक अज़ाब

आख़िर में काफ़िरों के लिए ख़ास अज़ाब का ज़िक्र है — उबलते हुए पानी का पीना और दर्दनाक सज़ा। यह सख़्ती सिर्फ़ कुफ़्र के लिए है, जबकि गुनाहगार मुसलमान, सज़ा के बावजूद, अल्लाह की मर्ज़ी से हल्की या अस्थायी सज़ा पा सकते हैं।

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