कुरान - 6:77 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

77
فَلَمَّا رَءَا ٱلۡقَمَرَ بَازِغٗا قَالَ هَٰذَا رَبِّيۖ فَلَمَّآ أَفَلَ قَالَ لَئِن لَّمۡ يَهۡدِنِي رَبِّي لَأَكُونَنَّ مِنَ ٱلۡقَوۡمِ ٱلضَّآلِّينَ

Transliteration: (Falammmaa ra al qamara baazighan qaala haazaa Rabbee falammaaa afala qaala la'il lam yahdinee Rabbee la akoonanna minal qawmid daaalleen)

फिर जब उसने चाँद को निकलते देखा, तो कहा: यह मेरा रब है। फिर जब वह डूब गया, तो कहा: अगर मेरा रब मुझे हिदायत न देता, तो मैं भी ज़रूर गुमराह लोगों में से हो जाता [155]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 77 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरा अल-अनआम – आयत 77

✅ [155]

हज़रत इब्राहीम عليه السلام ने अपने लोगों के सितारों और चाँद की पूजा के तरीक़े को तार्किक ढंग से खारिज किया। उनका यह कहना — "अगर मेरा रब मुझे हिदायत न देता" — अल्लाह के सामने विनम्रता का इज़हार था, लेकिन साथ ही यह दावा भी कि वह पहले से अल्लाह की हिदायत पर हैं। इसका मतलब यह है कि बिना अल्लाह की हिदायत के इंसान गुमराह हो जाता है, मगर इब्राहीम عليه السلام को अल्लाह ने शुरू से ही सच्ची राह दिखा दी थी, इसीलिए वह कभी गुमराहों में से नहीं हुए।

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