Transliteration: (Wa min aabaaa'ihim wa zurriyyaatihim wa ikhwaanihim wajtabainaahum wa hadainaahum ilaa Siraatim Mustaqeem)
इस आयत में बताया गया है कि सभी पैग़म्बरों के रिश्तेदारों को नुबूवत नहीं मिली। कुछ बाप, औलाद और भाई नबी बनाए गए, जबकि कुछ काफ़िर भी थे। यह साबित करता है कि नुबूवत सिर्फ अल्लाह का तोहफ़ा है, वंश से अपने आप नहीं मिलती।
अल्लाह ने अपने पैग़म्बरों को चुनकर सीधा रास्ता दिखाया, इसलिए उनका गुमराह होना नामुमकिन है। यह हिदायत किसी ताक़त से छीनी नहीं जा सकती, यहाँ तक कि शैतान भी इसे बदल नहीं सकता। जैसे सूरज की रौशनी को कोई बुझा नहीं सकता, वैसे ही नबी की हिदायत भी अटूट रहती है।
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