कुरान - 6:88 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

88
ذَٰلِكَ هُدَى ٱللَّهِ يَهۡدِي بِهِۦ مَن يَشَآءُ مِنۡ عِبَادِهِۦۚ وَلَوۡ أَشۡرَكُواْ لَحَبِطَ عَنۡهُم مَّا كَانُواْ يَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Zaalika hudal laahi yahdee bihee mai yashaaa'u min 'ibaadih; wa law ashrakoo lahabita 'anhum maa kaanoo ya'maloon)

यह अल्लाह की हिदायत है। वह अपने बन्दों में से जिसे चाहता है, उसे हिदायत देता है [175]। और अगर वे अल्लाह के साथ किसी को शरीक करते, तो उनके सारे अमल ज़ाया हो जाते [176] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 88 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 88 की तफ़्सीर

✅ [175] नुबूवत अल्लाह का खास तोहफ़ा है

इस आयत में साफ़ किया गया है कि नुबूवत की हिदायत सिर्फ उन्हीं को मिलती है जिन्हें अल्लाह चुनता है। यह न तो उम्र भर की इबादत से मिलती है और न ही मेहनत से। कोई भी अपने प्रयास से नबी के दर्जे तक नहीं पहुँच सकता, यह सिर्फ अल्लाह की मर्ज़ी पर है।

✅ [176] असली पैग़म्बर कभी शरीक नहीं करते

इस आयत में फ़र्ज़ी तौर पर चेतावनी दी गई है कि अगर पैग़म्बर भी शिर्क करते, तो उनके सारे अमल मिट जाते। लेकिन उनके अमल—जैसे काबा, सफ़ा, मरवा और कुर्बानी—हमेशा बाक़ी रहे, जो उनके सच्चे ईमान की दलील है। इसी तरह सहाबा का अमल भी उनकी ख़ुलूस और अटूट ईमान को साबित करता है

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