Transliteration: (Zaalika hudal laahi yahdee bihee mai yashaaa'u min 'ibaadih; wa law ashrakoo lahabita 'anhum maa kaanoo ya'maloon)
इस आयत में साफ़ किया गया है कि नुबूवत की हिदायत सिर्फ उन्हीं को मिलती है जिन्हें अल्लाह चुनता है। यह न तो उम्र भर की इबादत से मिलती है और न ही मेहनत से। कोई भी अपने प्रयास से नबी के दर्जे तक नहीं पहुँच सकता, यह सिर्फ अल्लाह की मर्ज़ी पर है।
इस आयत में फ़र्ज़ी तौर पर चेतावनी दी गई है कि अगर पैग़म्बर भी शिर्क करते, तो उनके सारे अमल मिट जाते। लेकिन उनके अमल—जैसे काबा, सफ़ा, मरवा और कुर्बानी—हमेशा बाक़ी रहे, जो उनके सच्चे ईमान की दलील है। इसी तरह सहाबा का अमल भी उनकी ख़ुलूस और अटूट ईमान को साबित करता है
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