कुरान - 6:90 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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أُوْلَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ هَدَى ٱللَّهُۖ فَبِهُدَىٰهُمُ ٱقۡتَدِهۡۗ قُل لَّآ أَسۡـَٔلُكُمۡ عَلَيۡهِ أَجۡرًاۖ إِنۡ هُوَ إِلَّا ذِكۡرَىٰ لِلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Ulaaa'ikal lazeena hadal laahu fabihudaahumuq tadih; qul laaa as'alukum 'alaihi ajran in huwa illaa zikraa lil 'aalameen)

ये वे लोग हैं जिन्हें अल्लाह ने हिदायत दी, तो तुम उनकी हिदायत का पीछा करो [181]। कह दीजिए (ऐ प्यारे नबी): मैं तुमसे इसके (कुरआन के) लिए कोई मजदूरी नहीं माँगता [182]। यह तो सिर्फ सारे जहानों के लिए नसीहत है [183] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 90 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 90 की तफ़्सीर

✅ [181] तमाम नबियों की खूबियाँ आख़िरी नबी ﷺ में पूरी

उनकी हिदायत का पीछा करो से मुराद पिछले नबियों की खूबियाँ हैं, जो पूरी तरह हुज़ूर ﷺ में मौजूद हैं। इसका मतलब यह नहीं कि अब दूसरे नबियों की इताअत की जाए, बल्कि वह सब के सरदार हैं और उनके सारे कमालात आप ﷺ में जमा हैं।

✅ [182] नबी ﷺ बदले में कुछ नहीं लेते

नबी ﷺ ऐलान करते हैं कि वह कुरआन पहुँचाने के बदले कोई इनाम या मुआवज़ा नहीं माँगते। उनका मिशन एक तोहफ़ा है, सौदा नहीं। जैसे अल्लाह बिना माँगे देता है, वैसे ही नबी ﷺ भी देते हैं, और उनका बदला सिर्फ अल्लाह ही दे सकता है।

✅ [183] नबी कमाने नहीं, ख़िदमत करने आते हैं

एक सच्चा नबी कभी नुबूवत को रोज़गार नहीं बनाता, बल्कि खुद कमाकर लोगों को देता है। झूठे दावेदार, जैसे मिर्ज़ा क़ादियानी, ने मज़हब को फायदे के लिए इस्तेमाल किया। हुज़ूर ﷺ सारे जहानों—इंसान, जिन्न, फ़रिश्ते, जानवर—के लिए रहमत हैं, और कुरआन सबके लिए एक याददिहानी है।

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