Transliteration: (Ulaaa'ikal lazeena hadal laahu fabihudaahumuq tadih; qul laaa as'alukum 'alaihi ajran in huwa illaa zikraa lil 'aalameen)
उनकी हिदायत का पीछा करो से मुराद पिछले नबियों की खूबियाँ हैं, जो पूरी तरह हुज़ूर ﷺ में मौजूद हैं। इसका मतलब यह नहीं कि अब दूसरे नबियों की इताअत की जाए, बल्कि वह सब के सरदार हैं और उनके सारे कमालात आप ﷺ में जमा हैं।
नबी ﷺ ऐलान करते हैं कि वह कुरआन पहुँचाने के बदले कोई इनाम या मुआवज़ा नहीं माँगते। उनका मिशन एक तोहफ़ा है, सौदा नहीं। जैसे अल्लाह बिना माँगे देता है, वैसे ही नबी ﷺ भी देते हैं, और उनका बदला सिर्फ अल्लाह ही दे सकता है।
एक सच्चा नबी कभी नुबूवत को रोज़गार नहीं बनाता, बल्कि खुद कमाकर लोगों को देता है। झूठे दावेदार, जैसे मिर्ज़ा क़ादियानी, ने मज़हब को फायदे के लिए इस्तेमाल किया। हुज़ूर ﷺ सारे जहानों—इंसान, जिन्न, फ़रिश्ते, जानवर—के लिए रहमत हैं, और कुरआन सबके लिए एक याददिहानी है।
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